कल्पना फिर से उल्टी कर देती है ,और आराम करने के लिए अंदर चली जाती है उसका पूरा दिन जी मचलाता रहता है, अगले दिन सुबह वो घर का काम कर रही थी,

नमस्कार प्रणाम मै शिवांग देव एक नई कहानी लेकर हाजिर हूं, एक छोटे से गांव में बिजलानी और कल्पना नाम की सास और बहू रहती थी, सास बिजलानी बहुत लालची औरत थी बहू कल्पना एक पढ़ी लिखी समझदार औरत है ,एक दिन बहू घर के सामने सफाई कर रही थी अचानक उसे चक्कर आए और उल्टी होने लगी ,मैंने कई बार कहा है कि बाहर का खाना मत खाया करो, लेकिन तुम लोग सुनते ही नहीं और बस पैसा खर्च करने में लगे रहते हो, वो कल्पना को डांट रही है कल्पना फिर से उल्टी कर देती है ,और आराम करने के लिए अंदर चली जाती है उसका पूरा दिन जी मचलाता रहता है, अगले दिन सुबह वो घर का काम कर रही थी, अरे कल्पना तुमने परसों रात का बना पुलाव क्यों फेंक दिया, ये सरासर बर्बादी है खाने की भी और पैसों की भी ,अगर खाना सड़ गया है तो फेंकने की बजाय क्या हमें उसे गर्म करके खाना चाहिए,क्यों नहीं खाना चाहिए हमें इसे गर्म करके खाना ही चाहिए, कल से तुम नहीं पकाना मैं देख लूंगी रसोई तुम्हारे बस की नहीं है, उसने बासी खाना गर्म किया और फिर खाने लगी बहू यहां आओ नाश्ता है, मेरा खाने का दिल 


नहीं हो रहा आप खा लो, क्या बहु तुम किसी जमीदार के घर की हो, आवो चुप चाप खा लो मेरे पास नाश्ते के लिए पैसे नहीं है ,और उसने उसके मुंह में जबरदस्ती एक निवाला ठूस दिया, बहू ने उसे खाया और तुरंत उल्टी करने लगी ,सांस ने देखा पता नहीं कैसी बहू है जो कुछ भी खाती है उल्टी कर देती है, कल्पना काफी देर तक उल्टी करती है और फिर आराम करने चली जाती है, उस दिन के बाद से उसे अक्सर उल्टी होने लगी ,मां जी मुझे चार दिन से उल्टी हो रही है मैं बहुत कमजोर हो गई हूं चलिए अस्पताल चलते हैं, सिर्फ उल्टी तो हो रही है इसके लिए तुमको मैं अस्पताल लेकर जाऊं ,वहां वोडॉक्टर ढेर सारे टेस्ट करवाने के लिए पर्चा पकड़ा देगा ,उसको तो बस बिल बनाना है लंबा चौड़ा ,मेरे पास नहीं है इतना पैसा, सोने से पहले एक नींबू का रस पानी में घोल कर पी लेना सुबह तक तबीयत ठीक हो जाएगी,उसने बहु से कहा और बाहर चली गई कल्पना बहुत कमजोरी महसूस कर रही थी ,इसी बीच उसकी एक सहेली वहां आई जो एक डॉक्टर थी, और उसे पुकारा कल्पना, फिर कल्पना को यहसास हुआं,यह तो सुधा की आवाज लग रही है वो उठने की कोशिश करती है ,लेकिन कमजोरी की वजह से उठ नहीं पाती, तुम बहुत कमजोर लग रही हो क्या हो गया तुम्हें कल्पना ,सारा हाल कह सुनाती सुधा को,हे भगवान 



तुम्हारी सास तो ज्यों की त्यों है, एक दिन सुना की मैंने तुम्हारी शादी के दिन देखा था शादी में आए सभी लोग उसे कोसते हुए गए थे ,क्या क्या हुआ था, तुम्हारी सास ने लंच के लिए बुलाया था 400 लोगों को, और खाना तैयार करवाया जो केवल 200 लोगों के लिए पर्याप्त था, और ऊपर से खाना परोसने वाले के पीछे खड़ी होकर उससे जरा जरा सा परोसने के लिए कह रही थी, हे भगवान क्या ऐसा हुआ था, मुझे नहीं पता क्या तुम जानती हो तुम्हें उल्टी क्यों हो रही है क्यों, तुम्हारे लिए खुशखबरी है तुम जल्द मां बनने वाली हो, सच में सुधा ऐसी खुशखबरी थैंक यू सो मच वे दोनों खुश होती है, इसी बीच सास वहां आ गई फिर सुधा ने उन्हें बताया कि कल्पना गर्भ से है ,मैं बहुत खुश हूं कि मेरा पोता जल्दी मेरी गोदी में खेलेगा ,पोते के बारे में तो नहीं जानती लेकिन पहले अपनी बहू को समय पर पौष्टिक भोजन फल और दवाईंयां दे ,अपने लालच के चलते उसकी सेहत के साथ खिलवाड़ मत कीजिएगा ,आजकल बजट करना भी लालच समझा जाता है, वो वहां से चली गई कुछ दिन बीत गए बहू गर्भवती होते हुए भी घर के सारे काम करती रहती है ,सास ऐसे व्यवहार करती है जैसे उसने कुछ भी नहीं देखा ना सुना हो ,एक दिन बहु को कुछ खट्टा खाने का दिल कर रहा था,क्या आप मेरे लिए आम लाकर देंगी, हे भगवान 



मुझे आमों को लाने के लिए बहुत पैसे खर्च करने पड़ेंगे, अब इससे क्या कहूं अरे मैं कल बाजार गई थी लेकिन आम कहीं भी नहीं मिला ,ऐसा लगता है कि सभी बस और ऑटो हड़ताल पर है, चार दिन के बाद फिर से शुरू हो जाएंगे, तब जाकर ले आऊंगी ,तब तक सब्र रखो ,और खट्टा खाने का दिल करे तो नींबू चूस ले इमली खा ले घर पर होंगी, ला दूंगी बाद में आम, बहू समझ नहीं पाती कि इस तरह की बात का क्या जवाब दे , बहू बिना कुछ बोले चली जाती है अपने कमरे में,दिन बीत रहे हैं बहू बहुत दुबली और थकी हुई लगती है, क्योंकि सांस उसे पौष्टिक भोजन और दवाईंयां नहीं खिलाती, एक दिन सुधा वहां अपने साथ फल लेकर आती है , सुधा उसकी स्थिति देखकर क्या तुम समय

पर खाना खा रही हो, और दवा ठीक से ले रही हो, अगर नहीं तो तुम्हारे अंदर पल रहे बच्चे के लिए ही नहीं यह तुम्हारे लिए भी खतरनाक हो सकता है, सुधा मैं क्या करूं मेरी सास इतनी कंजूस है कि मुझे अच्छी तरह से नहीं खिला रही वो दवाईंयां भी नहीं ला रही ,मैं क्या कर सकती हूं, सब मेरा दुर्भाग्य है, मेरे पति और ससुर भी यहां नहीं ,जब वो कह रही थी, सास ने सुन लिया ,हे भगवान तुम मुझे दूसरों के सामने दोषी ठहरा रही हो, मुझे दोष मत दो क्या मैं तुम्हें भूखा रख रही हूं ,जिस दिन तुम सास 



बनोगी 



उस दिन आएगा समझ में, आज तक किसी ने इस तरह मेरा अपमान नहीं किया ,हमने नहीं किए क्या बच्चे पैदा, तुम लोग तो ऐसे बातें करती हो जैसे तुम पहली हो जो बच्चे को जन्म दे रही हो, वो वहां से मुंह बनाकर चली गई, मैं तुम्हारी हालत समझ गई हूं तुम्हारी सास को तुम्हारी कोई परवाह नहीं है, मैं हर हफ्ते आऊंगी तब तक इन दवाओं को खाना शुरू कर दो नहीं तो खतरनाक हो सकता है ,वो प्रिस्क्रिप्शन लिखकर देती है और चली जाती है, मां जी जल्दी से यह दवाईंयां ले आइए, सुधा ने कहा है, अगर इन दवाईयों इस्तेमाल नहीं किया तो बहुत खतरनाक होगा ,वो तो पर्चा ही लिखेगी बस ,दवाई क्यों नहीं देकर गई आरोप लगाना आता है बस, ठीक है, दो पर्चा वो पर्चा, पर्चा लेकर मेडिकल शॉप गई इन दवाओं की कीमत कितनी होगी ,आंटी कुल 1000 खर्च होंगे, हे भगवान,

 सुनो क्या तुम ताकत के लिए कुछ दवा दे सकते हो ,वो एक टैबलेट का पत्ता देता है और कहता है कि वो 100 रूपये का है, उसने उसे पैसे दिए और उन दवाईयों को लेकर घर गई,  उन दवाईयों को बहू को देकर उन्हें लेने के लिए कहा, आप सिर्फ ये दवाईयां क्यों लाई है, जबकि उसने और भी दवाई लिखी थी, उन सबकी कोई जरूरत नहीं है, दुकानदार ने साफ कहा कि ताकत के लिए के एक दवा का उपयोग 

 


करें ,उसकी बात सुनकर बहू को बहुत दुख हुआ, मैंने कितनी बार कहा था कि दवाईंयां जरूरी है, लेकिन फिर भी नहीं लाई कुछ दिन बीत गए ,उसका नौवां महीना लग गया था इसीलिए उसने सुधा को अपने साथ रहने के लिए बुला लिया ,एक रात उसे लेबर पेन शुरू हो गई सुधा उसकी डिलीवरी कराने की कोशिश कर रही थी, सास भी वही थी बहू इतनी कमजोर है कि जोर ही नहीं लगा पा रही, हमें उसे अस्पताल ले जाना होगा, हे भगवान अस्पताल में कितना बिल बना देंगे, किसी तरह यही कर करा लो, सोरी कम से कम इस समय अपनी कंजूसी मत दिखाइए ,अगर कुछ भी गलत हो गया तो यह मां और बच्चे दोनों के लिए खतरनाक होगा , तब सुधा खुद कल्पना को अस्पताल लेकर जाती है, वहां उसने उसका सिजेरियन किया और बच्चा बाहर निकाला ,लेकिन अफसोस कि बच्चा मरा पैदा हुआ, उसे सही पौष्टिक आहार नहीं मिला था ,हे भगवान यह क्या हो गया ,मैंने अपने पोते के लिए कितने सपने देखे थे ऐसा क्यों हो गया, हे भगवान हे भगवान कह कर वो रोने लगी ,अब नाटक मत करो और रोवो मत यह सब आपकी वजह से ही हुआ है ,आपके लालच की वजह से वह बच्चा नहीं रहा, आपने उचित भोजन और दवाइया नहीं दी बहू को, नहीं तो सब कुछ ठीक रहता ,बच्चा मर गया, 



और कल्पना तुम्हारी वजह से बहुत कमजोर हो गई है, सब तुम्हारी वजह से ,प्लीज ऐसा मत बोलो मैंने कुछ नहीं किया, मैंने कुछ नहीं किया ,क्या ये सब मेरी वजह से हुआ है ,मुझे माफ कर दो बहू मुझे माफ कर दो कल्पना ने उसे सांत्वना दी ऐसा फिर कभी नहीं करना नहीं तो आपको प्रॉब्लम्स का सामना करना पड़ेगा ,मैं अपना लालच और अपनी कंजूसी फिर कभी नहीं दिखाऊंगी मेरा विश्वास करो ,यह सुनकर वे दोनों खुश हो गई ,दोस्तों यह कहानी अच्छी लगी है तो वीडियो को लाइक करें, चैनल को सब्सक्राइब करें,और आपके पास कोई नई कहानी है तो कमेंट करके हमें जरूर बताएं, थैंक्स फॉर वाचिंग माय स्टोरी वीडियो

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