Ma beti and Ghar jamai

 मेरा नाम कविता है और मेरी उम्र 34 साल है। मैं शहर में रहती हूं मेरे पति एक बिजनेसमैन है। मेरी एक बेटी है जिसका नाम अर्चना है उसकी उम्र 21 साल है। मैंने उसकी शादी 5 महीने एक अच्छे नौजवान लड़के से करा दी थी। लड़का नौकरी करता था अच्छा कामाता था और अच्छे स्वभाव का भी था तो मैं उसकी शादी अपनी लड़की से करवा दी। शादी करने का एक वजह ये भी था कि मेरे पति यानी अर्चना के पापा घर पर बहुत कम ही रहा करते थे। वह बिजनेस के सिलसिले में ज्यादातर बाहर ही रहते थे। घर में सिर्फ हम मां बेटी दोनों अकेले ही रहा करती थी। मैं सरकारी स्कूल की टीचर हूं। और मेरी बेटी भी बैंक में जॉब करती थी। मुझे मेरी बेटी के लिए ऐसा लड़का चाहिए था जो मेरी बेटी के साथ मेरे घर पर ही रहे घरजमाई बनकर। क्योंकि मेरी एक ही बेटी थी और मैं नहीं चाहती थी कि वो भी अपने ससुराल जाकर रहने लगे। जब मैं अपनी बेटी का रिश्ता ढूंढ रही थी तो मुझे किसी ने बताया कि एक लड़का मेरी नजर में है जो बहुत अच्छा खासा कमाता है । और अच्छी नौकरी भी करता है। दिखने में भी बहुत अच्छा है और अकेला ही रहता है। उस लड़के का माता पिता भाई बहन कोई भी नहीं है। तो 


मुझे लगा इसे बढ़िया तो कुछ हो ही नहीं सकता। जिसका परिवार नहीं है वो आराम से हमारे घर पर मेरी बेटी के साथ रह सकता है। मैंने बिना देरी किए मेरी बेटी अर्चना और उस लड़के कि शादी करवा दी। मेरे दामाद का नाम सरदीप था। उसकी उम्र लगभग 28 साल की है। शादी के बाद मेरी बेटी अपने पति सरदीप के साथ बहुत खुश थी। उन दोनों को देखकर मैं भी बहुत खुश थी। मैं स्कूल से पढ़ाकर शाम को जब घर जाती थी। तो मेरी बेटी और दामाद जी दोनों अपना अपना काम करके घर पर आ जाते थे। हम तीनों बहुत अच्छे और खुशी खुशी रह रहे थे। अब मेरा घर पूरा भरा भरा था। अब किसी चीज की हमें कोई कमी नहीं थी। धीरे धीरे कुछ महीने बीत गए। और हम तीनों आपस में एकदम घुल मिल गए थे। सरदीप मेरा दामाद मेरी हर बात मानता था। वो मुझे हमेशा अपनी बाइक पर बैठाकर मुझे स्कूल तक छोड़ देता था। और जब शाम होता था तो मुझे वापस लेने भी आया करता था। हम तीनों संडे के दिन मार्केट शॉपिंग करने या फिर डिनर करने हम तीनों जाया करते थे और बहुत मस्ती मजे किया करते थे। एक दिन अचानक से मुझे फोन आया कि मेरे पिताजी की तबीयत बहुत खराब है। ये बात सुनकर मुझसे 


रहा नहीं गया और मैं उन्हें देखनी के लिए गांव जाना चाहती थी । मैंने अपनी बेटी अर्चना और अपने दामाद सरदीप से भी अपने साथ चलने के लिए कहां पर मेरी बेटी बोली मां बैंक अभी बहुत काम चल रहा है अभी छुट्टी नहीं मिल पाएगी। हां आप अपने साथ सरदीप जी को ले जा सकते हो क्योंकि उन्हें छुट्टी मिल सकती है। अगली सुबह मेरी बेटी नहा धोकर ऑफिस के लिए तैयार होकर ऑफिस चली गई। मैं और मेरा दामाद भी पिताजी को देखने गांव के लिए निकल गए। हम दोनों बस स्टेशन के लिए ऑटो से गए और गांव की तरफ जाने वाली एक ही बस थी। हम लोग बस स्टेशन पर बस का इंतजार कर रहे थे। बस में बहुत भीड़ थी। अब गांव के लिए बस एक ही जाती थी। तो कैसे भी करके मजबूरन हमें उस बस में चढ़ना ही पड़ा। पहले बस में मैं चढ़ी उसके बाद पीछे से सरदीप भी बस में चढ़ गया। वहां पर हम लोगों को सीट नहीं मिली थी। इसलिए हम लोग खड़े खड़े जा रहे थे। थोड़ी देर बस ऐसे ही चलती रही और फिर दूसरे बस स्टॉप पर बस रुकी तो वहां पर और भी ज्यादा लोग बस में चढ़ गए। बस में बहुत ज्यादा भीड़भाड़ हो गई थी। पर कैसे भी करके गांव तो जाना ही था। बस फिर से चलने लगी। 8 मिनट बाद 


मुझे लगा कि मेरे पीछे कोई धक्का दे रहा है। मैं पीछे मुड़कर देखी तो वो सरदीप था। खैर काफी दिक्कत का सामना करके हम लोग अपने गांव पहुंच गए हैं। वहां पहुंचने के बाद में अपने पिताजी से मिली। और अपने भैया भाभी से भी मिली हम सब मिलकर बहुत देर तक आपस में बातें भी किए। फिर अगली सुबह में अपने घर के लिए वापस निकल गई। दिसंबर का महीना था और ठंड भी बहुत ज्यादा बढ़ गया था। मैं और सरदीप दोनों फिर से उस बस में भीड़ भाड़ का सामना करते हुए अपने घर पहुंच गए। दिसंबर में ठंड बहुत ज्यादा ही बढ़ गया था। जिसके कारण इस महीने की लास्ट डेट तक स्कूल में छुट्टियां हो गई। मेरी बेटी तो हमेशा काम पर जाया करती थी। क्योंकि उसकी नौकरी बैंक में थी। वो रोजाना अपने काम पर चली जाती । तो घर पर सिर्फ मैं और सरदीप ही बच जाते थे। संडे के दिन हम सभी लोग घर पर थे, ठंड बहुत ज्यादा थी इसकी वजह से हम लोग बाहर घूमने नहीं गए और अपने अपने कमरे में ही थे। मैं अपने रूम में बैठी थी कि मुझे कुछ देर में प्यास लगी। मैं पानी लेने अपने रूम से बाहर निकली तो मुझे कुछ आवाज सुनाई दी। मैंने देखा कि ये आवाज मेरी बेटी के कमरे से आ रही है। जब मैं उसकी 


कमरे के पास गई तो, मैंने सुना कि मेरे दामाद जी मेरी बेटी से किसी पेपर पर साइन करवाने की कोशिश कर रहे हैं पर मेरी बेटी ने कहा कि अच्छा अभी रख दो मैं पढ़कर साइन कर दूंगी। तो संदीप ने कहा कि क्यों तुम्हें मुझ पर विश्वास नहीं है। तो मेरी बेटी ने बीना पढ़े उस पेपर पर साइन कर दिया। मैं कुछ नहीं बोली और चुपचाप किचन में जाकर एक गिलास पानी पी और फिर अपने कमरे में जाकर टीवी देखने लगी। अगली सुबह मेरी बेटी काम पर चली गई तो, मैं भी नाश्ता करके अपने कमरे में आराम कर रही थी। तभी अचानक मेरी नींद खुली तो मुझे कुछ आवाज सुनाई दी। मैं अपने कमरे से बाहर आई तो मुझे एक लड़की सरदीप से बातें करते दिखाई दी। मैंने पूछा ये कौन है। तो वो कहने लगा अर्चना तो ऑफिस चली जाती है, तो आप पूरे दिन काम करके घर में थक जाती हैं इसीलिए मैं घर पर ये नौकरानी लेकर आ गया। पर मैंने कहा बेटा इसकी जरूरत नहीं है। मैं तो घर पर बैठे बैठे बोर हो जाऊंगी अगर मैं कुछ करूंगी ही नहीं तो। क्योंकि स्कूल की भी छुट्टियां चल रही है। तभी सरदीप ने कहा जैसा आप कहें और वो उस लड़की को जाने के लिए कहता है और सरदीप उसके हाथों में कुछ कागज पकड़ा 


कर उसे वहां से भेजता है मैं उस लड़की को रोकी और उसे बोली की दिखाओ ये कैसे कागज है। तो फिर वो लड़की घबरा गई और फिर वो वहां से भागने लगी मैंने कहा रुको नहीं तो मैं अभी पुलिस को फोन कर दूंगी। वो लड़की डर गई और डर के मारे उसने सारी सच्चाई बता दी। उसने कहा कि मैं सरदीप की पत्नी हूं। और आपकी लड़की से सरदीप ने सिर्फ पैसों के लिए शादी की थी। और उसने इस घर की प्रॉपर्टी पर आपकी लड़की से साइन करवा ली है। ये घर आपने जब अपनी बेटी के नाम की थी तब से लेकर आज तक सरदीप इसके पीछे पड़ा था। ताकि वो कैसे भी करके ये प्रॉपर्टी अपने नाम करवा सके। तो फिर मैंने कहा अच्छा तो फिर तुम इतने दिन तक कहां थी। और तुमने इसका साथ क्यों दिया। इधर में उस लड़की से बातें कर ही रही थी कि सरदीप पता नहीं कब भाग गया। मैंने तुरंत पुलिस को कॉल किया लेकिन सरदीप नहीं पकड़ा गया। और मैने उस लड़की यानी उसकी पत्नी दो दिन तक जेल में भी रखा की शायद कही वो उसको बचाने आए। लेकिन सरदीप उसे बचाने तक नहीं आया इतना खुदगर्ज लड़का मै अपनी जिंदगी में पहली बार देख रही थी। फिर मेरी बेटी ने कहा कि मां इसमें उस लड़की 


की कोई गलती नहीं है। और गलती जिसकी थी वो तो पता ही नहीं कहां भाग गया। तो फिर सजा हम इस लड़की को क्यों दे रहे है। मैने भी सोचा की हां मेरी बेटी सही बोल रही है। फिर हमने उस लड़की को जेल से रिहा करवा दिया दोस्तों ये छोटी सी कहानी से यही सिख मिलती है आप बिना जाने पहचाने किसी पर विश्वास ना करें।  कहानी पसंद आई हो तो 


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