Best romantic hindi story

Gija and Sali Best romantic story 


यह कहानी काल्पनिक केवल मनोरंजन के लिए है मेरा उद्देश्य किसी की भावनाओं को ठेस पहुंचाना नहीं है मेरी मैरिज 2010 में एक साधारण से परिवार में हुई थी, उस समय मेरी उम्र 20 साल थी, मेरे ससुराल में मेरी पत्नी, एक छोटी साली जिसकी उम्र 17 साल की थी और मेरे ससुर रहते थे, मेरी सास का देहांत लगभग 6 साल पहले ही हो गया था मेरी पत्नी का कोई भी भाई नहीं था और ससुर भी अक्सर अपने गाँव में रहते थे, इसलिए मुझे शादी के बाद अपनी पत्नी और साली के साथ उनके शहर वाले घर में रहना पड़ा, मेरी पत्नी देखने में बहुत सुंदर है साली से भी ज़्यादा, मैंने कभी भी अपनी साली को बुरी नजर से नहीं देखा, हम लोगों की जिंदगी बहुत ही मज़े से कट रही थी, शादी के एक साल बाद मेरी पत्नी ने एक सुंदर से बेटी को जन्म दिया, क्योंकि बच्चा अभी छोटा था और उन दोनों की देखभाल करने वाली कोई समझदार स्त्री नहीं थी तो मेरी माँ ने मेरी पत्नी को अपने घर बुला लिया, अब घर में मैं और मेरी साली अकेले रह गये थे, मैं उससे बहुत कम बात करता था और सुबह जल्दी काम पर निकलता था रात को देर से आता था, मेरी साली मुझे खाना खिलाने के बाद पड़ोस में रह रहे अपने चाचा के घर में सोने चली जाती थी और सुबह जल्दी आकर मेरे लिए खाना बना देती थी, सारी चीजें अपने हिसाब से सही चल रही थीं पत्नी से बिछड़े हुए लगभग एक महीना हो गया था, और अब मेरा मन बेताब होने लगा था, लेकिन कोई तरीका समझ में नहीं आ रहा था। मैं कभी कभी रंगीन फिल्म की सीडी लाकर रात में देख लेता था जिससे मेरे मन में हलचल बढ़ जाती, और प्यार करने का मन करने लगता, एक दिन मैंने सोचा कि क्यूँ ना अपनी साली को पटाया जाए, और उसके साथ मजे लिए जाए इससे मेरा काम बहुत आसान हो जाएगा और जब तक पत्नी नहीं आती है, तब तक जब भी मन करेगा, भरपूर मज़े ले सकूँगा. यही सोच कर मैं साली को पटाने का जुगाड सोचने लगा, एक़ दिन की बात है कि मैं रंगीन फिल्म वाली सीडी अपने बिस्तर पर तकिया के नीचे भूल गया और काम पर चला गया, बाद में मुझे याद आया कि मैं सीडी तो घर पर ही भूल गया हूँ, फिर मैंने सोचा कि कोई बात नहीं अगर वो सीडी साली ने देख ली तो मेरा काम और भी आसान हो जाएगा, अब मेरे मन में केवल अपनी साली के साथ सुहागरात मनाने का ख्याल घूमने लगा, शाम को जब मैं घर आया तो मेरी साली बिल्कुल नॉर्मल दिखी, वो वैसे भी मुझसे कम ही बात करती थी, और मैं भी उससे ज़्यादा बात नहीं करता था उसको नॉर्मल देख कर मेरा मूड खराब हो गया, लेकिन मेरे सारे सपने टूट गये, उस रात को मैंने अपनी साली के साथ प्यार के सपने देख कर दो बार बाथरूम जाकर उपर नीचे किया और अपनी प्यास शांत कर ली अब मैं अपना सारा दिमाग़ इस बात की सोचने में लगाने लगा कि कैसे अपने दिल की बात साली को बोलूं, पता नहीं वो भी मुझे पसंद भी करती है या नहीं, ऐसा ना हो कि कुछ बवाल हो जाए, यही सोचते सोचते सारा दिन बीत गया, मेरा काम में बिल्कुल भी मन नहीं लग रहा था उस दिन मैं शाम को जल्दी घर आ गया, मुझे शाम को जब मैं घर आया तो मेरी साली बिल्कुल नॉर्मल दिखी, वो वैसे भी मुझसे कम ही बात करती थी, और मैं भी उससे ज़्यादा बात नहीं करता था उसको नॉर्मल देख कर मेरा मूड खराब हो गया, लेकिन मेरे सारे सपने टूट गये, उस रात को मैंने अपनी साली के साथ प्यार के सपने देख कर दो बार बाथरूम जाकर उपर नीचे किया और अपनी प्यास शांत कर ली अब मैं अपना सारा दिमाग़ इस बात की सोचने में लगाने लगा कि कैसे अपने दिल की बात साली को बोलूं, पता नहीं वो भी मुझे पसंद भी करती है या नहीं, ऐसा ना हो कि कुछ बवाल हो जाए, यही सोचते सोचते सारा दिन बीत गया, मेरा काम में बिल्कुल भी मन नहीं लग रहा था उस दिन मैं शाम को जल्दी घर आ गया, मुझे देखकर मेरी साली ने एक प्यारा सा स्माइल दिया, और बोली जीजा जी आज तो आप बहुत जल्दी घर आ गये, आप चाय पीजिए, तब तक मैं सब्जी ले कर आती हूँ, मैं कपड़े बदलकर चुपचाप चाय पीने लगा और प्यासी नज़रों से साली को घूरने लगा, उसका खिलते गुलाब जैसा खूबसूरत शरीर मेरे अंदर प्रेम का तूफान पैदा कर रहा था, वो बोली मैं सब्जी लेकर आती हूँ और घर से बाहर निकल गई, मैं भूखी नज़रों से उसको देखता ही रह गया, बाज़ार से वापस आने के बाद वो अपने काम में लग गई और मैं कमरे से बाहर निकल कर कुर्सी पर बैठ गया, थोड़ी देर बाद जब मैं किसी काम से अंदर गया तो मैंने देखा कि कमरे का दरवाज़ा बंद है लेकिन उसमें कुण्डी नहीं लगी थी, मैंने धीरे से दरवाज़ा खोला और अंदर का नज़ारा देखकर मेरी आँखें फटी की फटी रह गईं, मेरी साली अपने कपड़े बदल रही थी, उसके शरीर पर केवल ब्रा और पेंटी थी, उसका शरीर बिल्कुल संगमरमर की तरह चिकना था, मैंने सोचा क़ि मौका बढ़िया है अभी जाकर इसको दबोच लेता हूं और अपनी इच्छा पूरी कर लेते हैं, लेकिन अंदर से एक डर भी था कि कहीं बात बिगड़ ना जाए क्योंकि हम दोनों के बीच कभी भी ज़्यादा बात नहीं होती थी और ना ही कोई हँसी मज़ाक होता था, अभी मैं ये सब सोच ही रहा था क़ि दरवाजे की घंटी बजी और मैं जल्दी से बाहर आ गया, दरवाजे पर पड़ोस में रहने वाली चाचा और उनकी बेटी आए हुए थे मेरा तो सारा मूड़ ही खराब हो गया, एक सुनहरा मौका आते आते हाथ से निकल गया, उसी बीच में चार दिन की छुट्टी लेकर अपने घर आ गया, क्योंकि अपने बेटी को देखे हुए काफ़ी दिन हो गये थे और पत्नी को भी बहुत दिनों से नहीं छुआ था, लेकिन घर आने के बाद भी पत्नी के साथ रात बिताने का मौका नहीं मिला, एक दिन रुकने के बाद मैं वापस आ गया, और मैंने जानबूझ कर शाम की ट्रेन पकड़ी, रात को लगभग बारह बजे मैं ससुराल वाले घर पहुँचा, मेरी साली और उसकी चचेरी बहन घर में थीं वो दोनों मेरे कमरे में मेरे ही बेड पर सो रही थी, मैंने उसको बोला यही लेटी रहो, मैं एक किनारे लेट जाऊँगा मेरी साली बीच में थी और उसकी चाचा की बेटी किनारे पर लेटी थी, मैं भी कपड़े बदल कर दूसरे किनारे पर लेट गया, लेकिन मेरी आँखों से नींद गायब थी, मैंने करवट बदलने के बहाने अपनी एक टाँग अपनी साली के ऊपर रख दी और अपना हाथ उसकी छाती पर रख दिया, मेरे हाथों की गर्मी से उसकी आँख खुल गई और मैं सोने का नाटक करने लगा, उसने सोचा कि मैं थकान की वजह से बहुत गहरी नींद में सो रहा हूँ, मेरा हाथ अभी भी उसकी छाती पर ही रखा था और मुझे उसकी धड़कनें तेज होती महसूस हो रही थीं, शायद मेरे स्पर्श से उसके अंदर भी प्रेम करने का संचार हो गया, तभी उसकी चाचा की बेटी ने उसकी तरफ करवट ली जिससे मेरी साली थोड़ा सा अलग हो गई, फिर मैं भी चुपचाप सो गया, लेकिन मैंने मन ही मन ये सोच लिया था क़ि अपनी साली को अब जल्दी ही पटाना है, मुझे अपनी चचेरी साली पर बहुत गुस्सा आ रहा था, अगर आज वो ना होती तो आज ही में अपनी साली के साथ सारे मज़े ले लेता, खैर कोई भी काम अपने समय से पहले नहीं होता, दूसरे दिन सुबह मैं देर से उठा और मैंने जानबूझ कर ऐसा दिखाया कि मेरा मूड बहुत खराब है, उस दिन मैं काम पर भी नहीं गया, दोपहर को खाना खाने के बाद मैं अपने कमरे में आकर लेट गया, थोड़ी देर बाद मेरी साली भी काम ख़त्म करके मेरे कमरे में आ गई, और उसने मुझसे पूछा, जीजा आपका मूड कुछ सही नहीं लग रहा है, क्या बात है, मैंने उसको बोला मेरी लाइफ बिल्कुल नीरस हो गई है, मेरी बीवी और बेटी मुझसे दूर हैं और मैं यहाँ अकेला पड़ा हूँ, सभी लोग अपने अपने परिवार के साथ रह रहे हैं, और मैं यहाँ अकेला पड़ा हूँ और बीवी और बेटी को प्यार भी नहीं कर सकता, मेरी वजह से आप दोनों को परेशानी उठानी पड़ रही है, मैंने उसको समझाया ऐसा नहीं है लेकिन उसने रोना बंद नहीं किया, फिर मैंने उसको गले से लगाया तो वो और तेज रोने लगी और मैं उसको चुप कराने लगा, तभी मैंने उसके माथे पर एक चुम्बन किया तो वो मुझसे कस कर लिपट गई पर वो लगातार रो रही थी, मैंने सोचा कि यही मौका है उसको सांत्वना देने के बहाने उससे प्यार करने का, तभी मैंने उसको चूमना शुरू कर दिया और उसके लबों को चूमने लगा, उसने हटने की कोशिश की तो मैं बोला आज मत रोको, मैं प्यार का बहुत भूखा हूँ, अगर तुम मेरा साथ नहीं दोगी तो कौन देगा, अगर तुम चाहती हो क़ि मैं परेशान ना रहूँ तो मुझे अपनी दीदी की कमी महसूस ना होने दो, मेरे प्यार को अपना लो, अब उसका विरोध कम हो गया और वो मेरी बांहों में लिपट गई, मैंने उसके लबों से प्यार करना शुरू किया और अपने हाथ से उसकी थैली के समोसे को दबाने लगा जिससे उसके अंदर भी प्रेम भर गई और वो मेरा भरपूर साथ देने लगी, उसने भी मेरे लबो को प्यार करना शुरू कर दिया, मैंने उसके बदन को सहलाना शुरू कर दिया, और उसने भी मेरे शरीर को सहलाना शुरू कर दिया, तभी मैंने उसके कपड़े उतारने शुरू कर दिए तो वो शरमाते हुए मना करने लगी और बोली मुझे बहुत शर्म आ रही है, मैंने आज तक किसी के सामने कपड़े नहीं उतारे यह सुनकर मैं बहुत खुश हो गया, क्योंकि मुझे एक कुँवारी लड़की मिलने वाली थी, मैंने उसको समझाते हुए कहा अरे पगली शरमाने से काम नहीं चलेगा, प्यार करने का असली मज़ा तो बिना कपड़ों के ही है, जब दो प्यार करने वाले आपस में बिना कपड़ों के मिलते हैं तो सुख दोगुना हो जाता है, धीरे धीरे मैंने अपनी जवान साली के कपड़ों को उसके शरीर से अलग कर दिया, अब वो केवल ब्रा और पैंटी में थी मैं भी अब केवल जांघिया में था, साली का खिलते कमल जैसा संगमरमर बदन देख कर मैं पागल हो रहा था, फिर मैंने उसकी ब्रा भी उतार दी और वो लंबी लंबी साँसें लेने लगी, और उसका शरीर अकड़ने लगा मैं समझ गया कि अब साली प्रेम करने का मन अपने चरम पर है, लेकिन अभी मैं उसको भरपूर मज़ा देना चाह रहा था जिससे वो मेरी दीवानी हो जाये, मेरी साली की आँखों में प्यार की लालिमा साफ झलक रही थी, वो तो जैसे पागल सी हो गई और बड़बड़ाने लगी आह जीजू  बहुत मज़ा आ रहा है, आज से आप मेरे जीजा जी नहीं, मेरे पति हो बहुत मज़ा आ रहा है, इतना मज़ा पहले क्यूँ नहीं दिया, सब कुछ हो जाने के बाद थोड़ी देर तक हम दोनों वैसे ही शांत पड़े रहे, फिर मैंने उसको अपने सीने से लगा लिया और प्यार करने लगा, वो भी मुझसे लिपटी हुई थी, मैंने प्यार से उसके गाल पर हाथ फेरते हुए पूछा कैसा लगा, तो वो मुस्कराते हुए बोली बहुत मजा आया, अगर मैं यह जानती क़ि आप मुझको पसंद करते हैं तो मैं ये दो महीना बर्बाद नहीं होने देती, रात को जब आप और दीदी कमरे में मज़े लेते थे तो आप लोगों की आवाज़ें सुनकर मेरा भी बहुत मन होता था क़ि कोई मुझे भी ऐसे ही प्यार करे, तो मैंने पूछा तुमने कोई बाय्फ्रेंड तो बनाया ही होगा, वो बोली नहीं जीजा जी, लड़के बहुत बेकार होते हैं, कोई गर्लफ्रेंड बन जाए तो सारी दुनिया में बताते घूमते हैं, और मैं नहीं चाहती कि कोई मेरे बारें में उल्टी सीधी बात करे, मैं तो शुरू से ही आप के साथ प्यार करना चाहती थी, इससे मेरा काम भी चलता रहता और घर की बात घर में ही रहती, ये सब सुनकर मैं बहुत खुश हुआ और उसको चूमने लगा, बाद मे मैं बोला इस खूबसूरत पल को एक यादगार दिन बनाना चाहता हूँ, वो बोली कैसे, तो मैंने कहा, जैसे शादी की पहली रात होती है, वैसे ही हम दोनों सुहागरात मनाएँगे, वो उठकर बाथरूम में चली गई और नहा धोकर बाहर आई और मुझसे बोली आप भी नहा कर फ्रेश हो जाओ, तब तक मैं दुल्हन की तरह तैयार होती हूँ, मैं नहाकर बाहर निकला तो वो मेरे बेड पर बिल्कुल दुल्हन की तरह सजी हुई बैठी थी और घूँघट भी किए थी, मेरा दिल तो खुशी के मारे पागल हो रहा था क्योंकि मैं दोबारा सुहागरात मनाने जा रहा था, वो भी एक कुँवारी कली के साथ, मैंने बिस्तर पर पहुँच कर उसका घूँघट उठाया तो उसको देखता ही रह गया, वो दुल्हन की तरह सजी हुई बहुत ही सुंदर लग रही थी, धीरे धीरे मैंने उसके सारे कपड़े उतार दिए और खुद के भी उतार दिए, मैंने उसके पूरे शरीर को चूमना शुरू किया और वो भी मेरा भरपूर साथ दे रही थी, उसके बाद हमने फिर से सुहागरात मनाई, शाम को हमारी नींद देर से खुली उसने जल्दी से उठ कर अपने कपड़े पहने और बोली आप भी कपड़े पहन लो, कहीं चाचा के घर से कोई आ गया तो प्राब्लम हो जाएगी, मैं कपड़े पहनकर कमरे से बाहर आया तो उसने मुझे गले लगाकर मेरे होंठों को चूमा और बोली अब तो मैं तुम्हारी घरवाली बन गई हूँ, तो अब जब तक दीदी नहीं आ जाती तब तक मुझे सुबह और शाम को डेली तुम्हारा प्यार चाहिए, उस दिन से दोस्तो मेरी तो दुनिया ही बदल गई, और मैं शाम को जल्दी आ जाता. हम दोनों के प्यार का सिलसिला चलने लगा, अब हम दोनों खुश थे मानो हम लोगो की दुनिया ही बदल चुकी थी, आपको यह कहानी मैन्युअल पढ़ना है तो शिवांग देव वेबसाइट पर पढ़ सकते हैं, दोस्तो ये थी आज की छोटी सी रोमांटिक कहानी,प्लीज वीडियो को लाइक करें, चैनल को सब्सक्राइब करे,

 


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