Emotional story in Hindi
एक व्यक्ति रेड लाइट एरिया के कोठे में जाता है। वहां का दरवाजा खोलकर जैसे सामने देखता है। तो सामने लगभग 30 अलग अलग महिलाएं हैं जो कि काफी सुंदर दिखाई दे रही थी। उन महिलाओं में से एक महिला को चुनने की उसको आजादी थी वो बारी बारी से महिलाओं को देख रहा था। और उनमें से किसी एक का उसको चुनाव करना था जैसे ही एक महिला पर उसकी नजर पहुंचती है। तो उस महिला की आंखें झुक जाती हैं उस महिला की झुकी हुई नजरों को देखने के बाद । वो सोचने पर मजबूर हो जाता है ऐसा लग रहा था कि ये चेहरा तो कुछ जाना पहचाना चेहरा है। क्योंकि उसके पहनावा। उसके कपड़े। पहले शायद उसने इस तरह से कभी उसे देखा नहीं था। वो उसी महिला का चयन करता है और उसे कमरे के अंदर लेकर जाता है। जब उससे बातचीत करता है तो पता चलता है कि वो महिला कोई और नहीं बल्कि उसी की धर्म पत्नी है ।उसी की बीवी है अपनी ही बीवी को उस रेड लाइट एरिया की कोठी में देखने के बाद। उसके पैर तले जमीन खिसक जाती है वो सोचने पर मजबूर हो जाता है। आखिरकार करे तो क्या करें ।ये कहां से कैसे यहां पर पहुंची बहुत सारे सवाल थे
उन सवालों के जवाब को जानने की कोशिश में था ।
और जब सवालों के जवाब जानता है तो वो एक ऐसा कदम उठाता है जिस कदम को सुनने के बाद शायद आप भी उसको तारीफ करने पर मजबूर हो जाएंगे। क्योंकि किसी भी महिला से चाहे छोटी से छोटी गलती हो जाने में हो ।या अनजाने में हो जाए तो। उसकी गलती माफ नहीं होती है बल्कि पुरुषों की गलती एक बार नजर अंदाज कर दिया जाता है। मगर इस पुरुष ने उस महिला की तमाम गलतियों को नजरअंदाज करते हुए जो कदम उठाया है वाकई बहुत अच्छा कदम उठाया। नमस्कार दोस्तों में जो कहानी सुनाने जा रहा हूं यह सच्ची घटना है कर्नाटक प्रदेश के राजधानी बेंगलुरु की है।दअसल एक व्यक्ति जिसका नाम अनिल है जो कि बेंगलुरु शहर का रहने वाला है ।एक मल्टीनेशनल कंपनी में काम करता था। उसकी कंपनी ने उसको एक असाइनमेंट के लिए बुलाया था मुंबई में कि आपको यहां पर आना है कुछ समय के लिए ।अभी दो या तीन महीने ही हुए थे उसकी शादी को ।अपनी पत्नी को छोड़कर वो जाना नहीं चाहता था लेकिन जिस मल्टीनेशनल कंपनी में काम कर रहा था उस कंपनी का मामला था। आखिरकार उसको जाना पड़ता है
जब वो वहां पहुंच जाता है एक दो हफ्ते काम करता है।
एक दो हफ्ते काम करने के बाद अपनी पत्नी से बातचीत करता है कहता है कि क्या तुम मुंबई घूमना चाहोगी। जैसे ये बात अपनी पत्नी से कहता है तो उसकी पत्नी एकदम खुश हो जाती है खिलखिला जाती है। कहती है कि मेरा तो सपना था बचपन का ।बचपन से ही मैं चाहती कि मैं मुंबई जाऊं। वहां जा जाके देखूं आज तक तो मैंने सिर्फ मुंबई को टेलीविजन पे या फिर फिल्मों में देखा है। साक्षात देखने को मिलेगा तो कितनी अच्छी बात है । जब अपने पति से इस तरह की बातें करती है तो उसका पति कहता है परेशान होने की जरूरत नहीं है 7 अक्टूबर 2012 का तुम्हारा रिजर्वेशन करा दिया गया है फला तारीख को फला वक्त में आपकी ट्रेन मिलेगी ।आप आराम से बेंगलुरु से मुंबई का सफर पूरा करके सीधा मुंबई आइए। मैं तुम्हारा इंतजार करूंगा। वो दिन भी आता है और जब दिन आता है वो घर से कुछ तैयारी के साथ सीधा बेंगलुरू के रेलवे स्टेशन पर जाती है। और अपनी निर्धारित ट्रेन अपनी निर्धारित बोगी अपने निर्धारित बर्थ पर जाकर बैठ जाती है । और सबसे पहले फोन करती है अपने सास और ससुर को। कहती है कि मम्मी पापा मैं ट्रेन
में बैठ गई हूं और लगभग 1000 किलोमीटर का ये सफर है। ए सफर 16 से 17 घंटे में पूरा हो जाएगा और मैं अनिल के पास पहुंच जाऊंगी। पहला फोन हो चुका था दूसरा फोन वो अपने पति को करती है। अपने पति से कहती है कि जी मैं ट्रेन के अंदर बैठ गई हूं। और मैं आपके पास पहुंच जाऊंगी आप परेशान मत होना। तो अनिल कहता है कि परेशान मुझे नहीं परेशान तुम मत होना ।बिल्कुल घबराने की जरूरत नहीं है किसी से ज्यादा बातचीत मत करना अपने सफर पर ध्यान देना ।और कोई ऐसी वैसी चीज मत लेना ।किसी के खाने वाने की चीज हो इस तरह की समझाने की कोशिश भी करता है। अब ट्रेन ये मुंबई के सफर के लिए चल पड़ती है। तो जिस बोगी में जिस बर्थ पर वो बैठी हुई है सामने वाली बर्थ पर दो व्यक्ति बैठे हुए हैं। एकदम अनजान व्यक्ति एक दूसरे से बातचीत भी नहीं कर रहे हैं ।मगर धीरे धीरे जब सफर आगे की तरफ चलता है तो वो दोनों व्यक्ति आपस में एक दूसरे का इंट्रोडक्शन लेते हैं। एक दूसरे से परिचय लेते हैं कि तुम कौन हो कहां से जा रहे हो कहां से आ रहे हो इस तरह की बातें वो करते हैं। ये महिला किसी से बातचीत भी नहीं कर रही है नाम तानिया है ।तानिया किसी से बातचीत नहीं कर
रही थी। तो बात कर रही थी तो या तो अपने सास ससुर से या फिर अपने पति अनिल से अनिल को बताती थी कि अब इतना किलोमीटर का सफर हो चुका है। अब मैं यहां पहुंच गई हूं खिड़की के बाहर झांक के बताती है कि देखो ऐसा दिखाई दे रहा है। वैसा दिखाई दे रहा है। इस तरह उसका जो सफर था वो कटने लगता है ।और जैसे जैसे वो आगे ट्रेन बढ़ रही थी तो उन्हीं दो व्यक्ति जो कि उसकी बर्थ के ठीक सामने बैठे हैं उनमें से एक व्यक्ति कहता है बहन जी लगता है कि आप पहली बार आप ट्रेन में सफर कर रही हैं वो भी मुंबई का। तो कहती है कि हां मैंने ट्रेन में तो बहुत सफर किए है लेकिन अकेले मुंबई मैं पहली बार जा रही हूं। जब दोनों इस बात को कहते हैं तो कहते हैं बहन जी आपको परेशान होने की बिल्कुल जरूरत नहीं है हम भी मुंबई जा रहे हैं। किसी भी तरह की कोई दिक्कत कोई परेशानी हो तो आप हमसे शेयर कर सकती हैं ।ऐसे ही बातचीत चल रही थी कुछ खाने पीने की चीजें थी उनके पास वो खा रहे थे । उन्होंने कहा बहन जी आप भी खाएंगे तो वो मना कर देती है लेकिन जब आगे वक्त गुजर रहा है। 15 से 16 घंटे का सफर है तो किसी भी अनजान व्यक्ति से इस लंबे सफर में आराम से बातचीत जब होंगी तो
जाहिर सी बात है कि। दोस्ती भी हो ही जाएगी। उधर तो उन दोनों की दोस्ती हो चुकी थी और उन दोनों ने इस तानिया से भी कहीं ना कहीं जान पहचान बना ली थी। तानिया जब अपना कुछ खाने पीने का सामान था तो खाते पीते उन लोगों की नजर उस तानिया की सामान पर पड़ती है ।तो आखिरकार तानिया की मजबूरी बन जाती है उस सामान को दिखाते हुए कि भाई साहब आप भी समय से सामान लेंगे ।जब वो बात उन दोनों व्यक्ति से कहती है तो वो व्यक्ति भी उसके सामान लेकर खाने लगते हैं ।कुछ देर के बाद कुछ सामान वो भी लेते हैं तो वो भी तानिया की तरफ हाथ बढ़ा देते हैं कि बहन जी आप भी कुछ सामान खाओगी। इस तरह से ये जो सफर था वो वाकई बहुत सुहाना था और बहुत बढ़िया सफर चल रहा था। चलते चलते लगभग 150 किलोमीटर के आसपास अभी बस मुंबई बाकी था। यानी कि किलोमीटर में से 850 किलोमीटर का सफर तय हो चुका था। तानिया अपने पति अनिल को फोन कर बुलाती है और कहती है कि मैं अभी आपसे 150 किलोमीटर दूर हूं। तो कहता कि तुम्ह परेशान होने की जरूरत नहीं है मैं तुम्हें लेने के लिए रेलवे स्टेशन पर आ जाऊंगा बस इतना ये फोन था ।उसके बाद
ये दोनों व्यक्ति कहते हैं कि बहन जी चाय पीएंगी कहती है कि मैं तो चाय नहीं पिऊंगी। आपको पीनी है तो आप पी लीजिए लेकिन वो दो चाय के साथ साथ तीसरी चाय भी लेते हैं। तो तानिया को चाय पिला देते और खुद भी चाय पीते हैं जब तानिया चाय पी लेती है चाय पीते ही तानिया एकदम बेहोश जैसी हालत में हो जाती है। नींद आने लगती है उसको लगभग दो या तीन घंटे के बाद जब आंख खुलती है तो ।पता चलता है कि तानिया अब ट्रेन के किसी बोगी या बर्थ के अंदर नहीं बैठी हुई है बल्कि वो एक कार के अंदर है और कार बहुत तेजी से चल रही थी। उसको जैसे ही हल्की हल्की उसकी आंखें खुलती है वो आंखें खोलने की कोशिश करती है तो पता चलता है कि वो बेहोशी जैसी हालत में थी ठीक से बोल भी नहीं पा रही थी। लेकिन उसको वही दोनों व्यक्ति कार के अंदर दिखाई देते हैं। एक व्यक्ति और था जो कार चला रहा था। ये एक नया व्यक्ति है जिसको देखने के बाद साफ अंदाजा लगाया जा सकता था क्योंकि उसका उसके साथ कोई ना कोई अनहोनी घटना हो चुकी है ।उनसे कहती है कि मैं कहां हूं तुम मुझे कहां लेके जा रहे हो इससे पहले कि वो कुछ बातचीत करती उसको जोर का एक
थप्पर पड़ता है। और कहा जाता है कि आवाज निकाली तो और पिटाई होगी इसलिए चुपचाप पड़े रहो। क्योंकि उसे चाय में कुछ नशीला पदार्थ दिया गया था उस चाय को पीने के बाद उसकी हालत ऐसी नहीं थी कि वो विरोध करने जैसी कंडीशन में हो। लगातार गाड़ी चल रही है और गाड़ी चलते चलते पहुंच जाती है एक ऐसे इलाके में जब उस कार को उस जगह पर लेकर जाते हैं। तो उसकी हालत चलने लायक नहीं थी लेकिन उन दोनों ने ऐसा पकड़ा हुआ था जैसे क्या वाकई वो उस महिला बीमारी जैसी हालत में हो ।ठीक ट्रेन से भी शायद उन्होंने उसको वैसे ही निकाला होगा महिला को ।अब ये सीधा पहुंच जाते हैं किसी रेड लाइट एरिया के एक कोठे पर और वहां पर दो महिलाएं बैठी हुई थी। उनसे बातचीत चल रही थी उसको बेचने की आखिरकार सौदा तैयार हो जाता है और कम से कम उसकी कीमत लगती है 40 से 45 हजार लेकर वो दोनों व्यक्ति वहां से रफू चक्कर हो जाते हैं। और वो महिला उसे हल्का हल्का होश आने लगता है और वो गिड़गिड़ाने लगती है वो रोने लगती है वो रहम की भीख मांगती है उन दोनों से भी ।वो उसको ठोकर मारते हुए वहां से निकल जाते हैं ।अब ये एक कोठे पर मौजूद थी
और कोठे का नजारा जब देखती है दृश्य देखती तो वहां पर पहले से ही कितनी ही लड़कियां थी। जिन्होंने अपने लिबाज भी ऐसे पहने हुए थे जिसे देखकर कोई भी पुरुष उत्तेजित हो जाए। अब उस महिला को एक कमरे में बंद कर दिया जाता है क्योंकि वो विरोध करने पर उतारू हो गई थी वो चीख रही थी चिल्ला रही थी। इसलिए उसको बांध कर एक कुर्सी पर रखा जाता है और चिल्लाए ना इसलिए उसका मुंह भी बंद कर दिया जाता है ।बात सात अक्टूबर को वो घर से चली थी अब ये 8 अक्टूबर 9 अक्टूबर इस तरह से एक एक दिन गुजरने लगता है और धीरे-धीरे करके लगभग 15 दिन गुजर जाते हैं ।उधर उसका पति रेलवे स्टेशन पर इंतजार कर रहा था काफी इंतजार करने के बाद जब उसकी पत्नी उसको वहां दिखाई नहीं देती है तो वो बहुत परेशान हो जाता है। फोन करता है तो स्विच आफ आता है अपने मां बाप के पास पहुंचता है फिर जाकर रेलवे स्टेशन पर जीआरपी को भी सूचना देता है ।साथ ही पुलिस स्टेशन में जाता है और अपनी पत्नी की गुमशुदगी दर्ज कराता है। वो तमाम कोशिशें करता है अपनी पत्नी को तलाश करने की। ताकि उसकी पत्नी मिल जाए सीधा वो बैंगलोर के रेलवे स्टेशन पर जाता
है ।और जाकर वहां के सीसीटीवी चेक कराता है देखता है कि वाकई उसकी पत्नी तो रेलवे स्टेशन के पर आई है और ट्रेन के अंदर बैठी है । लेकिन है तो कहां है वो तमाम कोशिशें कर रहा था उधर। इधर उसकी पत्नी टॉर्चर हो रही थी रोज उसको मारा जाता था रोज उसको पीटा जाता था रोज उसको खाना भी नहीं दिया जाता था। और जितना हैवानियत उसके साथ हो रही थी उसकी उसने कभी कल्पना भी नहीं की थी ।जब धीरे धीरे एक एक दिन गुजरने लगते हैं। 16 दिन के बाद उस कोठे की जो मालकिन है सुनीता पुजारी उससे कहती कि बहुत दिन हो गए। यदि आज तुम ग्राहक के लिए तैयार नहीं होती है तो फिर तुम्हारा वो हश्र किया जाएगा जिसकी तुमने कभी कल्पना भी नहीं की थी ।लड़कियों इसको समझा दो जो पहले से वहां लड़किया काम कर रही थी उन लड़कियों पर दबाव बनाया जाता है ।और वह लड़किया कहती है कि तानिया तुम मान जाओ क्योंकि अब यहां से तुम्हारे जाने के रास्ते सब बंद हो चुके हैं तुम्हें यही रहना होगा। यही काम करना होगा। अब तुम्हें कोई छुड़ा नहीं सकता कोई तुम्हें बचा नहीं सकता कोई तुम्हारी यहां मदद करने वाला नहीं आएगा। 16 में दिन आखिरकार तानिया टूट जाती है और
तानिया भी ऐसे कपड़े पहनती है जिस कपड़े को देखने के बाद कोई भी पुरुष उसकी तरफ उत्तेजित हो जाए आकर्षित हो जाए। और आज उन 22 महिलाओं में से तानिया का नंबर था क्योंकि ग्राहक ने तानिया को ही पसंद किया था तानिया को लेकर वो कमरे में जाता है। और जाने के बाद जैसे ही वो अंदर से दरवाजा बंद करता है तो। वो तानिया गिड़गिड़ाने लगती है रोने लगती है और रोती भी ऐसे है कि उस कमरे से उसकी आवाज बाहर नहीं जाती। उसकी आंखों में आंसू थे और वो आंसू टपक रहे थे रोते हुए पैरों को पकड़ के वो कहती है कि भैया मुझे माफ कर दीजिए ।मैं ऐसे ऐसे यहां पर चली आई हूं मेरे पति अनिल है जो कि मल्टीनेशनल कंपनी में काम करते हैं। मुझे तो सिर्फ यहां मुंबई घूमने के लिए आना था किसी ने मुझे चाय में कुछ नशीला पदार्थ पिलाया और मुझे यहां पहुंचा दिया। वो अपनी परेशानी अपना दर्द जब बया करती है। तो उस व्यक्ति ने हालांकि कोठे पर आने वाला व्यक्ति कभी शरीफ तो हो ही नहीं सकता इसलिए उस व्यक्ति ने इंसानियत का परिचय देते हुए कहा कि मैं तुम्हारी क्या मदद कर सकता हूं। जब बात मदद करने की आती है तब वो कहती है कि मुझे मेरे पति से बात करा दो। उधर उसका
पति अपनी पत्नी को तलाश करने की तमाम वो कोशिशें कर रहा था। आखिरकार वो बारबार फोन देखता था वो सोच भी रहा था तब फोन आता है सुबह शाम रोज फोन करती थी अब फोन आता भी नहीं है। फोन स्विच ऑफ आ रहा है लेकिन 16 में दिन जाकर जब एक अनजान नंबर से फोन आता है अनिल के पास। और आवाज आती है कि रोते हुए कि मैं तानिया बात कर रही हूं। मैं कहां हूं मुझे नहीं पता मुझे बचा लो मुझे यहां नहीं रहना है। जो पूरी कहानी कुछ बातचीत में सुनता है तो वो कहता है कि तुम हो कहां पर कहता है मुझे नहीं पता। तानिया मना कर दी थी मुझे कुछ नहीं पता। ये कहां है किस कमरे में है किस कोठे पर है किस रेड लाइट एरिया में है। वो इलाका कौन सा है सारी जानकारी वो व्यक्ति देता है जो व्यक्ति अभी तक उसकी मदत कर रहा था । अनिल को जब उसकी सूचना मिल जाती है तो अनिल सोचने पर मजबूर हो जाता है कि आखिरकार करूं तो क्या करूं। इसको कैसे बचाएं जब बात बचाने की आती है वो कहता है कि पुलिस के पास जाऊंगा। पुलिस वहां पर छापा मारेगी तो पता चला कि वो कोठे से गायब कर दिया है कुछ उसको नुकसान पहुंचा दिया तो। इसलिए वो ऐसा कुछ नहीं करता
है और वो पुलिस की मदद लेने के वजाय सीधा पहुंच जाता है ग्राहक बनकर उसी कोठे पर। और उसी कोठे पर जाने के बाद तब तक वो पुराना ग्राहक जा चुका था अब नया ग्राहक अनिल बनकर आता है। और उन महिलाओं में से तलाश करता है अपनी बीवी को ढूंढने की कोशिश करता है हर महिला को रिजेक्ट कर देता है यह नहीं चाहिए यह नहीं चाहिए । जब नंबर आता है तानिया का हां एक लड़की जो नई वाली है उसको ले आओ शायद उसको यह पसंद कर लेगा तानिया को देखता है तानिया को देखते ही उसकी बीवी की नजरें झुक जाती हैं और आंखों से आंसू टपकने लगते हैं। वो अपनी पत्नी को देखकर हैरान था परेशान था और सीधा कहता है कि मुझे यही लड़की चाहिए। उसको लेकर वो कोठे के अंदर जाता है और उसकी पूरी कहानी सुनता है कि आखिरकार यहां कैसे पहुंची। वो अपनी पत्नी से नाराज नहीं होता बल्कि उसको सीने से लगाता है और उसे कहता है कि तुम्हें परेशान होने की जरूरत नहीं है। अब जरूरत है हमें ठंडे दिमाग से काम लेने की और यहां से सोचो कि निकले कैसे। हमनें यहां से भागने की कोशिश की तो ये लोग
हम पे हमला कर देंगे हमें मार भी सकते हैं हमें नुकसान पहुंचा सकते हैं। तभी बैठे बैठे साहिल को एक तरकीब सोझी और वो पुलिस कंट्रोल रूम को फोन करता है।
पूरी कहानी 7 अक्टूबर से गायब होने से लेकर अभी तक की पूरी कहानी बताता है बताते बताते कहता है कि पुलिस को कि मेरी पत्नी रेड लाइट एरिया के फला कोठे पर फला रूम में है आप जल्दी से आ जाइए। पुलिस ने वाकई ईमानदारी का काम किया बहुत अच्छा काम किया मुंबई पुलिस भी वाकई तारीफ़ की हकदार है। मैं बात कर रहा हूं सन 2011 की उस किस्से की। भारी पुलिस वहां पर बहुत बड़ी संख्या में पुलिस पहुंचती है उस कोठे को घेर लेती है। साथ ही जब वहां पर छापा मारा जाता है वहां पर एक एक कमरे की तलाशी ली जाती है तो अनिल और तानिया भी एक कमरे के अंदर मौजूद मिलते हैं। और दोनों की हालत देखने दिखाने लायक थी पुलिस उन्हें सुरक्षित वहां से निकालती है। ना केवल तानिया को वहां से निकालती है बल्कि ऐसी कई लड़कियां थी जो ऐसे ही दलालों के चंगुल में फस जाती हैं। जब उन दलालों के बारे में पता करने की कोशिश की जाती है तो पता चलता है कि वो दलाल सिर्फ रेलवे स्टेशन बस स्टॉप ऐसी जगहों पर ही नजर
गाड़े रहते हैं गिद्द की तरह। कोई लड़की कोई महिला अकेली जा रही हो तो उसको। जो कि सुंदर दिखने में हो ताकि उसको निशाना बनाया जा सके। उसको किसी भी तरकीब से कोठे तक लाकर उसको बेचा जा सके। तानिया भी तो ऐसे ही बेचीं गई थी तानिया को बहुत देर के बाद होश आया था हालांकि वह अपने पति के पास थी। पुलिस ने उसको छोड़ा कर यहां से वापस बैंगलोर उन दोनों को भेज दिया। और पुलिस ने जब यहां से इसकी जो मालकिन है कोठे की सुनीता पुजारी और रदा शेख इन दोनों के साथ-साथ दो और व्यक्तियों को गिरफ्तार किया। साथ ही उन दोनों चारों की मदद से उन दोनों दलालों को भी कई दिनों की मशक्कत के बाद आखिरकार गिरफ्तार कर लिया। दोस्तों ये वाकई अनिल ने बहुत ही अच्छा बहुत ही इंसानियत का बहुत नेक काम किया जो उसने अपनी पत्नी की जिंदगी को बचाया। कोई भी अगर व्यक्ति होगा तो शायद अपनी पत्नी की इतनी छोटी सी बात को देखते हुए उस पर तमाम तरह के लांछन लगा सकता था और कह सकता था कि तुम यही कोटे पर रहो। अब मेरी जिंदगी में तुम्हें आने की कोई जरूरत नहीं है उसने इंसानियत का परिचय देते हुए अपनी पत्नी को बचाया।
और नई और कई लड़कियों को भी उसने वहां से बचाया
दोस्तों वाकी इस व्यक्ति ने तारीफ़ का काम किया है तारीफ़ का हकदार है। साथ ही मैं आपको जाते जाते मैं आपको बता दूं कि जब भी आप कभी सफर में हो तो किसी का सामान ना खाएं। किसी से ज्यादा दोस्ती। ना किसी से बातचीत करने की कोशिश ना करें। पता नहीं कौन व्यक्ति किस रूप में आपको नुकसान पहुंचा दे। जैसे कि इन दोनों दलालों ने तानिया को नुकसान पहुंचाया था। वो तो अच्छा था कि उसके पति ने उसको ऐसी दलदल में फसने से धसने से बचा लिया। तो दोस्तों यह कहानी पढ़ने के लिए वीडियो डिस्क्रिप्शन लिंक पर क्लिक करके पढ़ सकते हैं , मैं उम्मीद करता हूं आपको यह कहानी पसंद आई है। तो दोस्तों वीडियो को लाइक करें चैनल को सब्सक्राइब करें। थैंक्स फॉर वाचिंग माय स्टोरी विडीयो
टिप्पणियाँ
एक टिप्पणी भेजें