Best Romantic Hindi Story in

  वह बहुत देर तक मेरे साथ लूडो का मस्त वाला खेल खेलता रहा, उस दिन पहली बार मेरे भाई ने मेरे साथ, एक दिन में अपने भाई से कुछसीक्रेट बातें कर रही थी, मैंने उससे पूछा राजेन्द्र तुम्हारी कोई गर्लफ्रेंड है कि नहीं, राजेश बोला नहीं दीदी अभी तक ऐसी कोई नहीं मिली, अगर आप जैसी मिले तब तो प्रयासकरूंगा इतने में ही वहां पर मम्मी आ गई, और राजेन्द्र को किसी काम से बाहर लेकर चली गई, मेरे भाई के मुंह से आप जैसी बात सुनकर मेरे तो होश उड़ गए थे, मैं बस उसके ही बारे में सोच रही थी, यही सब सोचते-सोचते कब मेरी आंख लग गई मुझे पता भी नहीं चला, फिर जब मैं उठी तो मैंने देखा घर में कोई भी नहीं था, शायद मम्मी और राजेन्द्र अभी तक नहीं आए थे फिर में बाथरूम में जाकर नहाने लगी, तभी मां और राजेन्द्र भाई मार्केट से आ गए, तो मैं उसके पास जाकर बातें करने लगी फिर वह अपने स्कूल चला गया, और में भी अपने कॉलेज चली गई, मैं अपने कॉलेज में जाकर अपने भाई के बारे में ही सोच रही थी, क्योंकि आज तक किसी ने मेरे पर डोरे नहीं डाला था, फिर तभी मेरी एक सहेली मेरे पास आई और बोली अरे संगीता तुम क्या सोच रही हो इस पर मैं बोली नहीं रिना में तो कुछ भी नहीं सोच रही हूं, फिर मैंने उससे पूछा कि संगीता यार कोई उपाय बताओ कि कैसे पैसा कमाया जाए, क्योंकि अब तो हमारा कॉलेज भी खत्म होने वाला है, रिना मुझे गुस्से से देखी और बोली, अरे चल यार हमारे लिए पैसे कमाना आम बात है, फिर हम दोनों अपने-अपने घर की तरफ जाने लगे, क्योंकि हमारा क्लास नहीं चल रहा था, मेरी सहेली अपने घर की तरफ जाने लगी, इधर में भी जा रही थी तभी मैंने रास्ते में अपने भाई राजेन्द्र को देखा मुझेतो उसको देखकर मेरा होश उड़ गया, राजेन्द्र अपने साथ तीन लड़कियों को लेकर घूम रहा था, मुझे उस पर काफी ज्यादा गुस्सा आ रहा था, क्योंकि पापा इतना मेहनत करके पैसा लाते हैं, और हमें पढ़ने के लिए देते हैं लेकिन यह सारा पैसा बर्बाद कर रहा है, फिर मैं उसी गुस्से में घर चली आई और राजेन्द्र के आने का इंतजार करने लगी, मैं मम्मी पापा को भी यह सब बातें बताना चाहती थी, लेकिन मैंने नहीं बताया कि शायद उन्हें ठेस पहुंचेगी, फिर शाम के समय जब राजेन्द्र घर आया तो, मैं उसके कमरे में गई और देखा तो वह टीवी देख रहा था, मैंने उससे पूछा राजेन्द्र तुम मार्केट में लड़कियों के साथ क्यों घूम रहे थे, उनके साथ मत रहो वरना तुम्हें बर्बाद कर देंगी, उसने कहा नहीं दीदी मुझे तो उनके साथ 

घूमने में काफी मजा आता है, और मेरे लिए यही अच्छा समय है, अब नहीं घूमू तो कब घूमू वह मुझसे गुस्से में भी बोल रहा था, मैंने उसे बहुत बार समझाया कि तुम ऐसा मत करो लेकिन वह नहीं मान रहा था, मेरे बहुतकोशिशों के बाद वह बोला ठीक है, उनके साथ नहीं घूमूंगा लेकिन मेरी भी एक शर्त है, अगर तुम पूरा करोगी तो मैं उनके साथ रहना भी छोड़ दूंगा, मैं बोली हां बताओ क्या शर्त है तुम्हारी ,तो राजेन्द्र तुरंत बोला, जैसे लड़कियां मेरे साथ घूमती हैं, अब से तुम मेरे साथ घूमो भी, और मेरी जरूरतों को भी पूरा करोगी, मैंने उससे कहा नहीं यह नहीं हो सकता, मैं भला क्यों तुम्हारे साथ घूमेगी तो इस पर राजेन्द्र बोला तो फिर ठीक है मुझे मत समझाओ मैं जो भी कर रहा हूं तुम मुझे मत बोलो, फिर मैं बोली चलो ठीक है, शाम को सोचकर बताती हूं, इतना कहकर मैं उसके कमरे से अपने कमरे में चली गई, और बैठकर सोचने लगी अब मुझे पूरी तरह से समझ आ चुका था कि, मेरा भाई मुझसे क्या चाहता है, मेरे भाई की कही हुई बातों को सोच सोच कर मेरे दिल की धड़कन बहुत ही ज्यादा बढ़ गई थी, मैं अब तक यह सब एक्सपेक्ट भी नहीं किया था कि, मेरा भाई भी मेरे साथ ऐसा कुछ करने की सोच सकता है, मुझे तो 

लगा था कि, बाहर का कोई लड़का ही मेरे साथ पहली बार लूडो का खेल खेलेंगे, लेकिन यह बातें सुनने के बाद मुझे एहसास हो गया था कि, मेरा भाई ही मेरे जवानी का उद्घाटन करेगा, और मेरी ताबड़ तोड़ लूडो खेलने वाली ख्वाहिश को पूरा करेगा, यह सारी बातें सोच सोच कर मेरे दिल की धड़कन इतनी बढ़ चुकी थी कि, अगर कोई सामने रहे तो, उसे आसानी से सुनाई दे जाए, फिर मुझे कुछ दिन पहले की भी बात याद आ गई, कि वह मुझे कैसे देख रहा था, मैं उसको पूरी तरह से समझ गई थी वह क्या करना चाहता है, मेरे पास तो बहुत बड़ी समस्या थी कि अब मैं क्या करूं, अगर मैं हां नहीं बोलूंगी तो वह उन लड़कियों के चक्कर में बर्बाद हो जाएगा, और उसकी पढ़ाई भी खराब होगी, और अगर हां बोलूंगी तो वह मेरा भाई है, फिर मेरे दिमाग में अचानक ख्याल आया कि, शायद मुझे भी उसकी जरूरत है, और यह बात घर में ही रहेगी इससे हमारी इज्जत भी बची रहेगी, और मेरा भाई भी सुधर जाएगा, यही सब सोचते सोचते मैं सो गई, फिर जब मैं सुबह उठी तो, राजेन्द्र के कमरे में चली गई अब मैं भी उसके लिए बेताब हो रही थी, फिर मैंने उससे कहा ठीक है राजेन्द्र मुझे तुम्हारी शर्त मंजूर है, लेकिन चलो पहले हम शॉपिंग करेंगे 

बाद में तुम्हें जो करना है वह कर लेना, फिर मैंने उससे कहा कि यह बात बाहर किसी को पता नहीं लगना चाहिए, औ


र तुम उन लड़कियों के साथ भी आज के बाद मत दिखाई देना, वह बोला ठीक है, आज के बाद आप जैसा कहोगी मैं वैसा ही करूंगा, लेकिन मैं वर्षों से इस दिन का इंतजार कर रहा था, आज वह दिन आ ही गया,फिर मैं मम्मी के पास चली गई और नाश्ता बनाने लगी चूंकि आज रविवार था, तो हमें कहीं नहीं जाना था फिर मैं पापा और राजेन्द्र नाश्ता करने लगे, और उसके बाद मैं और राजेन्द्र शॉपिंग करने चले गए, मार्केट जाकर राजेन्द्र ने मुझे कपड़ा दिलवा दिया, और अपने लिए भी कपड़ा ले लिया साथ ही मैंने अपनी मम्मी के लिए भी एक साड़ी खरीद ली, फिर शॉपिंग करके हम एक रेस्टोरेंट में गए, और वहां से खाना खाकर घर चले आए, फिर शाम होते ही मेरा भाई राजेन्द्र मुझसे कहने लगा चलो अब अपनी शर्त पूरा करो तो फिर मैं भी शर्त के मुताबिक अपना काम करने लगी, हम एक कमरे में चले गए कमरे में बहुत ज्यादाअंधेरा था तो में लाइट जलाने को कहा, इस बात पर मेरा भाई भी राजी हो गया, वह मुझसे कहने लगा कि हां लाइट जला लो, मुझे आज सब कुछ साफ-साफ देखना है, और उसने लाइट जला दी, और धीरे-धीरे करके लूडो खेलने की तैयारी करने लगा, मेरा दिल बैठा जा रहा था, मेरे दिल की धड़कन समुद्र की लहरों की तरह उठ रही थी, वह साफ-साफ किसी भी सामने वाले इंसान को सुनाई दे रही थी, लेकिन मेरा भाई इतना दिवाना था कि, धीरे-धीरे करके मेरे साथ वह सारी चीजें करने लगा, जो एक पति अपनी पत्नी के साथ करता है, राजेन्द्र को मैं नहीं बस उसकी ख्वाहिश से ही देख रही थी, वह किसी भी हालत में अपनी ख्वाहिशों को पूरा करना चाहता था, जो कि उसने किया और वह बहुत देर तक मेरे साथ लूडो का मस्त वाला खेल खेलता रहा, उस दिन पहली बार मेरे भाई ने मेरे साथ लूडो की तीन पारियों का जबरदस्त ताबड़तोड़ खेल खेला था, उसके बाद जो होना था वह हो गया, मेरा भाई भी काफी खुश था और साथ साथ मुझे भी काफी खुशी मिली, अब मेरा भाई बहुत ज्यादा सुधर गया है, वह किसी के साथ घूमता भी नहीं है, सिर्फ पढ़ाई करता है और शाम को मेरे साथ लूडो की पारी खेलता है, इस तरह से हम लोग खुशी-खुशी रहने लगे, मुझे भी मजबूरी में यह सब करना पड़ा था, लेकिन इसमें मेरा कोई भी घाटा नहीं था, क्योंकि मुझे भी मजा तो मिल ही रहा था, लगभग चार महीने बाद मेरा प्राइमरी स्कूल टीचर का जॉइनिंग लेटर आ गया, और मैं वहां चली गई अब हमारा परिवार भी अच्छे से चलने लगा था, तो दोस्तों अगर कहानी पसंद आई हो तो, अपने दोस्तों में शेयर करें



टिप्पणियाँ

इस ब्लॉग से लोकप्रिय पोस्ट

Best romantic hindi story

suvichar: Best romantic story

Ma beti and Ghar jamai