Hindi Romantic story

 


एक बार दिवाली के दिन रेलगाड़ी के सफर में एक आन्टी से मुलाकात हुई. और फिर आन्टी के साथ क्या हुआ. इसका आनंद इस कहानी में लें. नमस्कार दोस्तो. मैं रमन उत्तर प्रदेश का रहने वाला हूँ. मेरी उम्र २२ साल है !! रंग गोरा और शरीर ठीक-ठाक है. मैं शक्ल से एक खूबसूरत दिखने वाला व्यक्ति हूँ. मुम्बई में मेरे पापा का आईसक्रीम का कारोबार है कुछ साल पहले की बात है. रात में पापा का फोन आया था कि मुम्बई में काम का कुछ ज्यादा लोड हो गया है.जल्द ही मुझे मुम्बई आना होगा इस वजह से मुझे दिपावली के दिन ही ट्रेन पकड़ना पड़ा. मैं प्रतापगढ़ से मुम्बई उद्योग नगरी एक्सप्रेस से मुम्बई जा रहा था. ये ट्रेन सप्ताह में एक दिन चलती थी, जो सभी लोग को मालूम था.जैसा कि मैंने पहले ही आप लोगों को बताया कि ये वाकिया दिपावली के अवसर का था. मैं दिपावली के दिन ही मुम्बई जा रहा था. दोपहर को तकरीबन ४ बजे ट्रेन आकर स्टेशन पर लगी जल्द बाजी में मैंने आरक्षण नहीं करवाया था इसलिए मैं एक अच्छी जगह देखकर ट्रेन में खिड़की वाली सीट पर बैठ गया. ट्रेन चलने से दस मिनट पहले एक अच्छी खासी मस्त आन्टी मेरे सामने वाली खिड़की के पास बैठ गई उस आन्टी को देखने से लगता था कि उनकी उम्र 3१-3३ साल की रही होगी. आन्टी का रंग गोरा था और आन्टी ने एक गहरे पिंक रंग की साड़ी पहनी थी जिसमें उनका गोरा बदन और भी मस्त लग रहा था ट्रेन की जिस बोगी मैं बैठा था उसमें सिर्फ मैं और वो औरत ही थी दिपावली के दिन होने की वजह से पूरी ट्रेनलगभग खाली थी ट्रेन के चलने के कुछ देर बाद उन्होंने मुझसे पूछा कि आप कहां तक जाओगे मैंने कहा मुम्बई तक और वो बोलीं गोवा में मेरी ननद रहती है उसको बच्चा होने वाला है. और वो बाइक से गिर गई है.उसी के पास जा रही हूँ. वो हस्पताल में भर्ती है. मेरा बेटा अभी छोटा हैI इसलिए उसे मैं अपनी सास के पास छोड़ आई हू और पति विदेश में सर्विस करते हैं इसीलिए मैं अकेली ही जा रही हैं एक ही सांस में आन्टी अपनी राम कहानी, मुझे सुना दी. में अबतक उनकी तरफ देख रहा था. मुझे उनकी आंखों में अजीब सी कशिश दिख रही थी,जो मुझे मोहित किए जा रही थी. हम दोनों में काफी देर बातें होती रहीं. आन्टी भी मेरी तरफ से बिल्कुल बिंदास हो गई थीं और खुल कर बातचीत कर रही थीं. यूं ही बातें होते होते रात के १२ बजगए. मुझे अब हल्की ठंड लग रही थी, तो मैंने अपने बैग से चादर निकाल कर ओढ़ ली. थोड़ी देर बाद आन्टी भी कहने लगीं मुझे भी अपने चादर में ले लो, मुझे भी ठंड लग रही है. पहले तो मैं सोचने लगा कि आन्टी को सोने का समय हो रहा है. फिर मैंने उनको अपनी सीट पर बुला लिया और हम दोनों एक ही चादर में सो गए. आन्टी मेरे कंधे पर अपना सर रखकर सोने लगीं. जैसे ही उन्होंने मेरे कंधे पर सर रख कर आंखें बंदकी मुझे एक अजीब सी फीलिंग होने लगी थी. आन्टी को सोये हुए थोड़ी देर ही हुई होगी कि मुझे मस्त सी सिरहन होने लगा. मेरे शरीर से गर्म रगड़ से तापमान बढ़ने लगा ये मस्त अहसास मुझे गर्म कर रहा था तभी उन्होंने कहा में पैर फैला कर सोना चाहती हूँ. तुम्हारी 

जांघ पर अपना सर रख कर लेट जाऊं? मैंने हां कर दिया. थोड़ी देर तक आन्टी के इसी पोजीशन में सोने से मेरी तो हालत खराब होने लगी थी. किसी अनजान औरत का संपर्क पाकर सिंघम को गुस्सा आने लगा था. इसी बीच किसी स्टेशन पर ट्रेन रुकी और एक चाय वाला चाय पूछता हुआ आया. मैंने उससे एक कप चाय ली और आन्टी को भी चाय पीने के लिए जगाया ,आन्टी आप चाय पियोगी ? उनका कोई उत्तर नहीं मिला तो मुझे ऐसा महसूस हुआ जैसे वो गहरी नींद में सो रही हों मैंने दुबारा उनसे नहीं पूछा मैं अपनी चाय को खत्म करने लगा तभी गाड़ी चलदी. आन्टी यूं ही मस्ती से सोई हुई थीं‌ और मेरा एक हाथ उनके सर पर और दूसरा हाथ उनकी बाज़ू पर था. थोड़ी हिम्मत करके मैंने अपना हाथ सरका कर थैली में समोसे को टच किया. तो उधर की तरफ से कोई प्रतिक्रिया नहीं मिली.फिर मैंने थोड़ी और हिम्मत करके  समोसे का वजन चेक करने लगा समोसे पर हाथ घुमा दिया. पर घोड़ी तो अब भी घोड़ी बेच कर सो रहीथी, मैंने थोड़ी देर समोसे टटोले. जब उनकी तरफ से कोई प्रतिक्रिया नहीं मिली, तो मैंने एक समोसे को थोड़ा जोर से दबा दिया. मगर अबभी कुछ नहीं हुआ. इसी प्रकार जब सामने की तरफ से भी कोई प्रतिक्रिया नहीं हुई तो मैंने एक हाथ समोसे की थैली में घुसा दियाऔर दूसरे हाथ से नीचे चटनी को ऊपर से ही सहलाने लगा थोड़ी देर बाद आन्टी की सांसें भारी होने लगीं, तो में समझ गया यह सोने का नाटक कर रही हैं. ये समझते ही मेरा मनोबल और बढ़गया. थोड़ी देर बाद मेरा हाथ अपने समोसे की थैली से निकाल कर हटा दिया और धीरे से बोलीं- ये क्या कर रहे हो तुम? उनकी इस अचानक हुई प्रतिक्रिया से मैं तो एकदम से डर गया और उनसे अलग हो गया. ट्रेन में वो वाला प्यार की कहानी बनते बनते रह गयी. वो भी उठकर बैठ गई थीं. थोड़ी देर यूँ ही अलग बैठने के बाद भाभी ने मुझसे पानी की बोतल मांगी. मैंने उन्हें पानी की बोतल दे दी और उन्होंने पानी पी कर बोतल वापस दे दी आन्टी फिर से मेरी जांघ पर सर रखकर सो गई. लेकिन मेरे सिंघम को गुस्सा आने लगा अब मेरे कंट्रोल से बाहर हो रहा था. थोड़ी देर बाद वो कहने लगीं मुझे कुछ गड रहा है. आन्टी ने अपने हाथ से मेरे सिंघम पकड़ कर कहा ये अंदर में क्या रखे हो? मैंने कहा- कुछ नहीं है.. उसपर आप मेरा मफलर डाल दो फिर वो बोलीं मुझे नींद आ रही है, मुझे सोने दो आप ऐसी हरकतें मत करो मैं थोड़ा डर गया. अब मैं भी खिड़की से सर लगा कर आराम से सो गया थोड़ी देर बाद मैंने महसूस किया की सिंघम के साथ कुछ हरकत हो रही है आन्टी अपने एक हाथ को अपने सर के नीचे दबा कर सो रही थीं और दूसरे हाथ से सिंघम का मुआयना कर रही थीं. मैंने कहा- आन्टी आपको कुछ चाहिए क्या उन्होंने ना कह दिया. फिर उन्होंने धीमे से कहा सिंघम बहुत बड़ा है मैंने पूछा- क्या? उन्होंने दबाते हुए कहा- ये जो सिंघम मुझे गड़ रहा है मैंने उनकी इच्छा समझते हुए कहा-आप इसका दर्शन करोगी इस पर उन्होंने कुछ नहीं बोली. थोड़ी देर बाद मैंने देखा कि वह जंजीर खींच रही थी. मैं सोने का नाटक करने लगा. आन्टी ने मेरी जंजीर हटा दी थी और सोए सिंघम को छेड़ कर उसकी शान में गुस्ताखी कर रही थी, सिंघम अब गुस्से में आगबबूला होने लगे और खड़े होने लगा था थोड़ी देर बाद आन्टी सिंघम को अपने हाथों से मखमली एहसास देने लगी, अब मुझसे भी बर्दाश्त नहीं हुआ और मैंने थैली खोल कर समोसे पर हाथ डाल दिया वो उठ कर बैठी फिर मस्ती से सिंघम को मखमली एहसास दे रही थीं. मैं समोसे को उछाल उछाल कर खेलने लगा, और समोसे खानें लगा. थोड़ी देर बाद मीठे एहसास में बड़बड़ाने लगीं, तो मैंने एक हाथ को थैले में डाल दिया. मुझे आश्चर्य हुआ अंदर कवर वाली पैकिंग नही थी और उनकी मैदान एकदम सफाचट था. थोड़ी बहुत घास ऊपर के हिस्से में थी बाकी नीचे पिच के आजू बाजूका जंगल साफ था. किसी 5 स्टार के जैसे घास की डिजाइन बनाई हुई थीं. जैसे ही मैने उंगली को पिच पर रखा और कुरेदने लगा, पिंच काफी सॉफ्ट लग रही थी अब मस्ती में झूमने लगी थी आन्टी के पिच पर लगातार हाथ फेर रहा था और मुआयना कर रहा था,अब पिच में नमी नजर आने लगी थी, पिच गीली होने लगी थी, अब मैं भी परेशान होने लगा. थोड़ी देर ऐसे ही करने के बाद अपने दहकते अंगारे अपने उनके दहकते सोलो पर रख दिए. आन्टी भी कदम से कदम मिला कर चलने लगी. क्या गजब की एक्सपर्ट थी ये करने में ,आन्टी अपने कोमल ओठो से मेरे मुँह के साथ कबड्डी खेलनेलगी थी. मैं तो एकदम से सातवें आसमान पर पहुंच गया था. मैंने.पोजीशन बदली और टांगों के बीच में बैठा लिया. उनको अपना रोल समझते देर न लगी, मैंने अपना सुपर हीट लोलीपॉप निकला और मुँह में दे दिया. बड़े मजे से लोलीपॉप चूसने लगीं. उनकी हरकत इतनी अधिक पेशेवराना थी.जैसे आन्टी एक नंबर की पक्की लोलीपॉप लवर हों. सारी लोलीपॉप गटकने के बाद बोली, लोलीपॉप का स्वाद बहुत मजेदार है बहुत दिनों के बाद ऐसी मजेदार तिखा स्वाद मिला है. मेरा पति विदेश में रहता है,जिस वजह से मुझे लोलीपॉप नही मिलती, मेरा भी मन करता है।कि मैं हर रोज करूं, मगर रोज रोज आप जैसा कहां मिलता है. मैं भी आन्टी की बातें सुनकर मस्त होने लगा था !!! वो सिट पर लेट गई और उन्होंने सिंघम को भी निमंत्रण दे दिया था तो सिंघम खड़े हो कर चले गए. थोड़ी देर समोसे खानें के बाद, मैंने आन्टी को इशारा किया !! कि अब सिंघम को दरबार में लेने के लिए तैयार करो. आन्टी सिंघम को तयार करने लगी. दो-तीन मिनट बाद, सिंघम फिर से खड़ा हो गया. मैंने कहा- आन्टी अब थोड़ा आगे का कार्यक्रम होना चाहिए. आन्टी  आंख से इशारा करते हुए कहा- आपका क्या मतलब

है? मैंने कहा अपना दरबार खोलो और सिंघम को अंदर विराजमान कराइए, उन्होंने मुस्कराते हुए सीट पर चादर बिछाई और चित लेट गई. और दरबार खुलने लगा था, आन्टी ने दरबार का में गेट खोल दिया, मैंने भी बिना देर किए, सिंघम को तयार किया और दरबार के दरवाजे के ऊपर नीचे चहलकदमी करने लगा. वो आनंद में आकर पूरा सिंहासन हिला रही थी, थोड़ी देर के बाद उनके मुँह से आवाज आई अब मत तड़पाओ सिंघम जल्दी से आ जाओ, अब अजीमो शान शहंशाह, दरबार में प्रवेश करने लगे !!!! अभी बस सिर ही अन्दर गया था कि वो चिल्लाने लगीं थोड़ा धीरे आइए सिंघम . उसकी आवाजों से मुझे लगरहा था जैसे एक साल से दरबार बंद था. इस वजह से दरवाजा टाइट हो गया था. फिर मैने सिंघम को बाहर निकाला और फिरसे सिंघम को पूरी ताकत से धक्का दे दिया और पूरा राज गद्दी तकपहुंचा दिया, आन्टी के मुँह से एक जोर की आवाज निकली. कुछ पलों बाद सिंघम ने दरबार में जगह बना ली थी, तो आन्टी को भी खुशी से मजा आने लगा था. वो दरबार झुला झुला कर साथ दे रही थीं तकरीबन दस मिनट सिंघम दरबार में राज गद्दी पर उछलकूद करनेके बाद पोजीशन बदल गई, अब सिंघम के सामने घोड़ी तयार खड़ी. थी. सिंघम पीछे से चढ़ बैठे और धड़ा धड़ घुड़सवारी करने लगे 10 मिनट में जब सिंघम पसीना निकला तो वो थक कर उतर गए, घोड़ी भी अबथक चुकी थी. इस तरह पूरी रात का सफर हमारा वो वाला प्यार का सफर बना रहा, 2 बार कार्यक्रम संपन्न हुआ, अब तकसुबह के 5 बज चुके थे.कपड़े ठीक किए और आमने सामने बैठे कर आपस में बातें करने लगे हमारे इसटेशन आने वाले थे. ट्रेन छोड़ने से पहले आन्टी ने मुझसे मेरा नम्बर मांगा और जल्द ही फिर से मिलने का वायदा किया मैं आन्टी से अपने नम्बर साझा करके बहुत खुश था. दोस्तो ये थी आज की छोटी सी रोमांटिक कहानी,प्लीज वीडियो को लाइक करें, चैनल को सब्सक्राइब करे,






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