Best hindi kahani || Hindi Story

 सासू मां को मरे हुए 8 महीने ही हुए थे कि मेरे ससुर जी रोज रात मे करीब 12:00 बजे चुपके से मेरे बेडरूम खिड़की से झांका करते थे एक दिन अचानक मेरी नजर उन पर पड़ी तो मेरे पैरों तले से जमीन खिसक गई मेरा नाम कामिनी बर्मा है मेरी उमर 30 साल की है, में एक शादी शुदा स्त्री हूँ। मेरे पति का नाम उमेश बर्मा हे वो 32 साल के है। वो एक प्राइवेट कम्पनी में ऊंची पोस्ट पर नौकरी करते है। हमारी शादी को 3 साल हो गए थे। लेकिन अभी तक मेरे बच्चे नहीं हुए थे हमारे परिवार में हम दोनों पति पत्नि, और मेरे सास ससुर रहते थे और उनकी बेटी जो बनारस में अपने सुसराल में रहती है, उसे छोड़कर कुल मिलाकर 4 लोग है। हम सब अपनी ज़िन्दगी में बहुत खुश थे। अचानक हमारी खुशियो को किसी की नज़र लग गयी और मेरी सासु माँ का एक एक्सीडेंट में निधन हो गया। जिससे हमारे घर में शोक की लहर छा गयी। सासू मां के अंतकाल से मेरे ससुर जी बहुत ज्यादा टूट गए थे। मैं जब भी ससुर जी को देखती वो अकेले में बैठे रो रहे होते। और मेरे पति उमेश ने बहुत समझाया कि ऐसा न किया करो,आप घर के बड़े हो आपको हमें हौसला क्या देना है, बल्कि खुद ही होसला हार रहे हो। हमारी बात सुनकर वो कुछ पल के लिए चुप हो जाते थे लेकिन अकेले में फिर से रोते रहते। इस तरह से 6 महीने तक निकल गए। लेकिन बाबू जी को अपनी पत्नी को भुला पाना बहुत ही कठिन काम लग रहा था। फ़िर हम लोगों ने विचार किया की उन्हें कुछ समय के लिए हमारी बनारस वाली ननंद घर भेज दिया जाय, ताकि उनका मन बहल जाये। क्योंके अक्सर ही देखा गया है कि जब हम घटना वाली जगह से दूर हो जाते है, तो हमारे मन में नई जगह का महोल घर कर लेता है, और घटी हुई घटना कुछ पल के लिए

इंसान भूल जाता है। ननंद के घर पर बाबू जी एक महीने के करीव रहे लेकिन वैसे ही रोते घर वापिस आ गए। उन में कोई बदलाव नही आया हम लोगों को बाबू जी को बाहर भेजने का कोई फायदा नहीं हुआ। इस बार मैंने अपने बाबू जी में एक खास बदलाय नोट किया 



की वो किसी बहाने मेरे शरीर को बार बार देखते थे या फिर कहलो की छूने की कोशिश करते थे। दिल कर रहा था की पति को फोन करके सारी बात बता दू फिर सोचा की अगर मेरे पति मेरी बात पर यकीन नहीं करेंगे तो मैं क्या करूंगी मेरे पास कोनसा कोई सबूत है यही सोचकर मैं चुप हो गई पहले तो मुझे लगा की शायद मेरा ये वहम होगा लेकिन एक दिन तो हद ही हो गयी। मैं वाथरूम में जा रही थी। की मैंने देखा की वहां पर वाबू जी गये हुए थे और दरवाजा अंदर से बन्द था मुझे कुछ अंदर से अजीव सी आवाजें सुनाई पड़ रही थी मैं सोच रही थी की बाबू जी इतना टाइम वहा क्या कर रहे है फिर में सोची की बाबू जी कभी भी बाहर आ सकते है। इतना सोचते ही तो मेरी हालत खराव हो गयी और मैं बिना बाथरूम गये ही वापिस अपने वेडरूम में आ गयी। पहले तो मेरे मन में ख्याल आया की उमेश सारा मामला वता दू। पति ने मुझे इन्तजार करने के लिए बोला लेकिन मैंने यह कहकर मना कर दिया और सारी रात जागते हुए ही निकल गई। अगली सुबह उमेश शहर से बाहर 2 महीनों के लिए आफिस के मीटिंग के सिलसिले में दूसरे शहर चले गए। अब में और बाबू जी हम दोनों घर पे रह गए। मेरा डर के मारे एक एक पल बरसो जैसा निकल रहा था। मेरा डरना भी लाजमी था। पूरा दिन भर घर का काम किया और पिछली रात को नींद न आने के कारण मुझे नींद बहुत ज्यादा आ रही थी। मैं वैसे तो साडी पहनती हूँ। लेकिन गर्मी होने के कारण कुछ दिनों से सलवार कमीज़ ही पहनती थी। लेकिन घर में मैं साडी ही पहनती थी और पूरा घर का काम सम्भालना वड़ा कठिन काम था। मेरा पूरा शरीर पसीने से भीग जाता था। तो में अपने वेडरूम में आकर पंखे के नीचे लेट गई घड़ी में 4 बज रहा था। तो मुझे पत ही नही चला की कब मेरी आँख लग गयी। करीब आधे घण्टे वाद मैने मेहसूस किया की मुझे कोई हाथ लगा रहा है, पहले तो मुझे लगा शायद मेरे पति है क्योंकि उमेश अक्सर हमेशा घर पर ही रहते थे। फिर मैं एकदम से हड़बड़ाहट में उठी और अपने कपड़े ठीक किये और 


पुछा, बाबू जी आप यहाँ , कोई काम था तो मुझे बुला लिया होता? बाबू जी बोले, बहु चाय पीने का बहुत मन कर रहा था, इस लिए आवाज़ लगाई थी। तुमने कोई जवाव नही दिया। मैने सोचा बहू सो गई होगी तो में सीधा अंदर चला आया । तो मेने देखा की तुम सोई हुई थी तो मैने सोचा सोई हुई को क्यों उठना, में खुद ही चाय बना लेता इतने में तुम जाग गई। इन शब्दों में मानो बाबू जी ने अपनी सफाई पेश कर दी हो। में झट से बेड से निचे उतरी, मेरा दिल धक धक कर रहा था और अपनी साड़ी का  पल्लू अपने सिर पे लेकर कहा, आप अपने कमरे में जाइये, मैं चाय लेकर आती हूँ। मेरे इतना कहने से शायद उसका दिल टूट सा गया, वो अपने कमरे में चले गए। करीब पांच  मिनट बाद में 1 कप चाय और बिस्किट लेकर मैं उनके कमरे में गयी। वो अब रो रहे थे। मेने पुंछा" अब क्या हुआ बाबू जी, आप रो क्यों रहे हो कोई दिक्कत है क्या, आपकी तबियत खराब है तो डॉक्टर को फोन लगाकर बुला लेती हूँ। फिर बोले" नही बहु कुछ नहीं बस आज मेरा दिल तेरी सासू माँ को याद करके रो रहा है। उनकी कमी मुझे बहुत खल रही है। उनसे करने वाली बाते मैं किस से करू। मैं भी इंसान हूँ मेरी भी कुछ ख्याहिशे है। मेरा भी दिल करता है की मैं अपनी दिल की सारी वाते किसी से शेयर करू बाबूजी की ऐ बात सुनते ही मेरे दिमाग में अजीब सी हलचल मचने लगी अब में बच्ची तो थी नही, जो उनकी बातो को न समझ पाती , वावू जी जिंदगी के मजे लूटना चाहते थे उनकी बातो से मैं भी इमोशनल हो गई। क्योंके वो सही कह रहे थे। मैने सिर्फ कल्पना में ही सोचा की यदि मेरा पति न हो तो मैं क्या करूगी। में अपने बाबू जी की जगह पर खुद को रखकर सोच रही थी, उनकी एक एक बात सच्ची प्रतीत हो रही थी। बाबू जी मुझे गले लगाकर जोर जोर रो रहे थे। मेरे दिल में भी अनेको तरह के विचार आ रहे थे। मुझे उनपे दया भी आ रही थी। एक बार तो मन में आया की इनको खुस कर दू। फिर मुझे याद आया मैंके की वो बात अनीता का पति अनीता की बेवफाई से तलाक दे दिया था फिर 


घर की इज़ज़त का ख्याल आ गया की बहु बेटी को कुछ कह दिया तो बहुत अनर्थ हो जायेगा। हम किसी को मुंह दिखाने लायक नही रहेंगे। घर परिवार में ही इसका हल हो जाये। बाबू जी की इत्नी उम्र हो चुकी थी मैने दिल पे पत्थर रखकर उनके कुछ कामो को कबूल कर लिया। लेकिन घर की इज़्ज़त पे कोई आच न आये। इस लिए मैने उहें नहाने को कहा और उनके कपड़े निकाल के उनको दे दिए फिर बाबू जी नहाकर वापिस आ गए। उन्होंने बनियान के निचे टावल को धोती की तरह लपेट था वो थोड़ा सा मुस्कुराए और मैं उनकी इस हरकत से हल्का सा मुस्करा पड़ी। उन्होंने भी हसके मेरी मुस्कराहट का जवाब दिया। किसी न किसी तरह वो दिन निकल गये। अगले दिन जब सुवह की चाय देने उन्हें उनके कमरे में गयी वो रात को शाथद तोलिये को लपेटकर ही सो गए । मेने हल्का सा दरवाजे को धक्का दिया तो दरवाजा खुल गया बावू जी बनयान पहन कर सो रहे थे उनकी इस हरकत से मुझे सुबह सुबह बहुत गुस्सा आया। लेकिन मैं बोली कुछ नहीं, वन्कि वही चाय ढक के रखकर चली आई और अपने कामों में व्यत हो गयी। करीव एक घण्टे बाद वो आये और बोले, "बहू जरा सा तेल गुनगुना करके ले आओ मेरे सिर और बदन पे मल दो। मुझे नहाने जाना है। मुझे उनकी नियत तो पहले ही पता चल गयी थी। लेकिन फिर भी कोई प्रकियया न होने की वजह से कोई सबूत नही था। में कटोरी में गर्म करके तेल लेकर आ गई और उन्हें बोला," लो बाबू जी, तेल लगालो क्यों की मुझे कपड़े धोने जाना है। फिर बाबू जी बोलें, "बहु सिर पे तो में खुद ही लगा लूंगा लेकिन पीठ पे कैसे लगाउँगा। सो तुम ही ये कष्ट करदो। इतना बोलकर वो आँगन में पड़ी खाठ पर औधे मुंह लेट गए। मुझे बहुत ही गुस्सा आ रहा था। मैं उनकी पीठ पे तेल लगा रही थी। करीव 5 मिनट के बाद उन्होंने साइड वदलते हुए कहा, "तम्हारे हाथ तो तेल से भीगे ही है, मैं न चाहते हुए भी उनकी हर वो वात मानती चली जा रही थी। और दोनों हाथो से उनकी मालिश करने लगी। में सोच रही थी की शायद सासु माँ जिंदा होती । तो ये सब मुझे न करना पड़ता। 


इन 2 दिनों में मेरा बहुत बुरा हाल था उमेश के बिना मैं तो कैसे रहूं गी और 8 महीने से ऊपर हो गए, सासू मां का अंतकाल हुए मैं इतनी सोच में डूबी हुई थी और सब कुछ वही छोड़कर कमरे के अंदर आ गयी। वो उठकर मेरे कमरे में आ गए और बोले," क्या हुआ बहु तुम चली क्यों आई। कोई बात है तो बताओ, क्या उमेश के बिना दिल नही लग रहा हैं। में हूँ ना बोलो क्या चीज की कमी है। में वो कमी पूरी करने की कोशिश करूँगा। मैं अंदर ही अंदर रोती रही की अब मैं क्या करूं और किसी तरह से मैंने दो महीने बिताए जब उमेश घर पर आए तो मैं बाबूजी सारी हकीकत बताई तो उमेश मुझे लेकर दूसरे शहर चले गए और मैं अपनी इज्जत भरी जिंदगी जीने के लिए आजाद थी ऐसे ससुर जी की बारे में आपकी क्या राय है आप उनको कैसे पनिशमेंट देना चाहते हैं आप कमेंट करके हमें जरुर बताएं दोस्तो उम्मीद करता हूं आपको हमारी कहानी पसंद आई होगी कहानी पसंद आई है तो वीडियो को लाइक करें चैनल पर नए हैं तो चैनल को सब्सक्राइब करे और हां नोटिफिकेशन बेल को जरूर दबाए ताकि अगली अपडेट सबसे पहले आपको मिले सो फ्रेंड थैंक्स फॉर वाचिंग माय स्टोरी वीडियो 




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