Long Emotional story in Hindi

 

मां को हार्ट अटैक आया है🙏🙏🙏🙏🙏

अपने माता-पिता की नौकरों जैसी हालत देखकर बेटे की आंखों में आसू गए | "मोहित ने रसोई में जाकर देखा तो पापा बर्तन साफ कर रहे थे! अचानक मोहित को वहां देख नेहा के होश उड़ गएमो हित ने घर आकर अपने माता-पिता की ऐसी हालत देखी तो उसके होश उड़ गए किटी पार्टी से लौटी अपनी पत्नी को एक जोरदार थप्पड़ जड़ दिया तुम्हारी हिम्मत कैसे हुई मेरे मम्मी पापा के साथ ऐसी हरकत करने की। यह घर उनके बेटे का है तुम इसे कोई दहेज में नहीं लेकर आई हो। मोहित ने नेहा के ऊपर झलाते हुए कहा, मुझे लगा था कि कुछ दिनों में तुम मेरे मम्मी पापा को अपने माता पिता की तरह प्यार और सम्मान दोगी, क्योंकि हर रिश्ते को समझने में वक्त लगता है लेकिन तुमने तो मेरे मां बापा की हालत नौकरों से भी ज्यादा बद से बदतर कर दी, तुमने 1, 1 दाने का हिसाब मांगा उनकी बेइज्जती की, वह अपने बेटे की कमाई खाते हैं। तुम्हारी बाप की नहीं समझी तुम,अपना सामान बांधों और चलती बनो यहां से, मोहित ने तमक कर कहा, मोहित अपने माता-पिता से हाथ जोड़कर माफी मांगने लगा। और वो दिन याद करने लगा जब वह अपने माता-पिता को अपने साथ शहर लेकर आया था। एक दिन मां की तबीयत बहुत ज्यादा खराब हो गई थी। उसकी मां को हार्ट अटैक आया था तो मिश्रा जी ने पड़ोसी की मदद से, उन्हें अस्पताल में दाखिल करवाया गया था। डॉक्टर ने उनके इलाज के लिए एक मोटी रकम मांगी थी, लेकिन मिश्रा जी के पास इतने पैसे नहीं थे कि वह इतने सारे पैसे जमा कर इलाज करा पाते, उन्होंने अपने बेटे मोहित को फोन किया हेलो बेटा मोहित मैं पापा बोल रहा हूं। तुम्हारी मां को हार्ट अटैक आया है यह सुन मोहित  सन्न रह गया, और भावुक होकर बोला, कैसे कब आया पापा और आपने मुझे बताया क्यों नहीं, बेटा आज सुबह ही आया है तुम कुछ पैसे भेज दो बस डॉक्टर ने पूरे ₹1 लाख मांगे हैं। मोहित नम आंखों से बोला, पापा आप कैसी बातें कर रहे हैं आप वहां ऐसी हालत में अकेले हैं और मैं यहां.. नहीं पापा, आप डॉक्टर से कहो, कि वह इलाज शुरू करें मैं अभी पहुंच रहा हूं, और आप चिंता मत कीजिए मां बिल्कुल ठीक हो जाएगी, मोहित हड़बड़ा कर घर आया अपनी पत्नी से बोला हमें अभी मां पापा के घर जाना है मां को हार्ट अटेक आया है। ओह मोहित तुमने मेरा सारा मूड खराब कर दिया तुम्हें पता है ना आज मेरी सहेली की शादी की सालगिरह है हमें वहां जाना है फाइव स्टार में पार्टी रखी है तुम कहीं नहीं जाओगे तुम मेरे साथ चलोगे, और मोहित तुम अपनी मां की चिंता क्यों कर रहे हो बुढ़ापे में ऐसी बीमारियां लगी रहती हैं, नेहा मोहित के हाथ में हाथ डालते हुए बोली, मोहित ने अपना हाथ झटकते हुए कहा । तुम्हारा दिमाग खराब हो गया है क्या, मेरी मां हॉस्पिटल में भर्ती है और तुम्हें पार्टी की लग रही है तुम्हें नहीं जाना तो मत जाओ। लेकिन मैं अपने पापा को इस हालत में अकेले नहीं छोड़ सकता समझी तुम । मोहित ने तुरंत फ्लाइट पकड़ी और सीधे हॉस्पिटल पहुंचा, अपने पापा को दूर से देखकर दौड़ कर उन्हें गले लगा लिया। मिश्रा जी बेटे के गले लग कर रोते हुए बोले बेटा देखो. तो तम्हारी मां की क्या हालत हो गई। पापा मैं आ गया हूं ना, अब सब ठीक हो जाएगा, और मोहित ने अपने पिता के आंसू पूछे, और उन्हें एक चेयर पर बैठा दिया। मोहित अपने पापा के हाथ को पकड़ कर बोला, पापा आप यहां बैठिए बस, भगवान से प्रार्थना कीजिए मैं अभी आता हूं, मोहित जाकर सबसे बड़े डॉक्टर से मिला, डॉक्टर साहब चाहे जितना पैसा लग जाए लेकिन मेरी मां को कुछ नहीं होना चाहिए, डॉक्टर ने मोहित को दिलासा दीया, मोहित जी आप चिंता मत कीजिए हम पूरी कोशिश करेंगे आपकी माता जी को बचाने की। फिर डॉक्टर कमला जी का इलाज करने में जुट गए, कुछ ही दिनों में कमला जी पूरी तरह ठीक हो गई, मोहित अपनी मां को अस्पताल से घर लेकर आया और कुछ दिन मोहित ने वहीं रहकर उनकी सेवा की, लेकिन काम की वजह से फोन पर फोन आ रहे थे, तो मिश्रा जी ने अपने बेटे से कहा, बेटा अब तुम्हारी मां बिल्कुल ठीक है। हां उसके जोड़ों का दर्द तो हमेशा का है, क्या करें अब बुढ़ापा है। उसका कुछ नहीं कर सकते, तुम अब अपने काम पर लौट जाओ मोहित ने हां में सिर हिला दिया, अगले दिन मोहित के हाथ में दो बैक देखकर उसके मम्मी पापा चौक गए, अरे बेटा इसमें क्या है कोई साग सब्जी लेकर जा रहे हो क्या, नहीं पापा यह सब बैग में आपका सामान है, आप दोनों मेरे साथ चल रहे हैं शहर, नहीं बेटा हम यही सही हैं बस तुम हमसे मिलने आत रहना, हमारे लिए वही बहत है, तुम तो जानते हो बेटा, कि बहू हमें कुछ ज्यादा पसंद नहीं करती, मिश्रा जी कहते कहते भावुक हो गए, पापा आप उसकी चिंता मत कीजिए मैं सब कुछ संभाल लूंगा पर आप दोनों को मैं अब अकेले नहीं छोड़ सकता, बेटे के इतने जिद करने पर कमला जी और मिश्रा जी दोनों बेटे के साथ शहर आ गए, अपने सास-ससुर को अपने घर देख नेहा का गुस्सा सातवें आसमान पर चढ़ गया, कमला जी के कदम अपने बेटे के घर में पड ही नहीं रहे थे, तो मोहित मुस्कुराता हुआ बोला, मम्मी पापा, यह आपका ही घर है बेझिझक और पूरे अधिकार के साथ आइए, और मोहित ने अपने मम्मी पापा का हाथ पकड़ा और उनको उनके कमरे में ले गया। उस कमरे को देखकर कमला जी और मिश्रा जी भावुक हो गए पापा मैंने जब यह घर खरीदा था तभी आपका कमरा बिल्कुल आप दोनों के हिसाब से सेट करवा लिया था, बेटे का प्यार देखकर दोनों ने मोहित को गले लगा लिया, पापा अब आप दोनों आराम से यहां रहिए मैं आपके लिए चाय नाश्ते का इंतजाम करवाता हूं, अपने मम्मी पापा को उनके कमरे में छोड़कर जैसे ही बाहर आया, नेहा मोहित का हाथ पकड़कर खींचते हुए अपने कमरे में ले गई, तुम्हारा दिमाग खराब हो गया है क्या, किसने कहा था तुम्हें इन गवार बुड्ढे बुढ़िया को यहां लाने के लिए, नेहा जुबान संभाल कर बोलो, वो मेरे मम्मी पापा हैं और तुम्हें उनकी चिंता करने की कोई जरूरत नहीं है। मैं अकेला ही बहुत हूं अपने मम्मी पापा की देखभाल के लिए लेकिन एक बात ध्यान रखना, तुम्हारी वजह से मेरे मम्मी पापा को कोई तकलीफ नहीं होनी चाहिए वरना मुझसे बुरा कोई नहीं होगा। मोहित ने अपनी मम्मी-पापा की देखभाल के लिए एक मेड रख ली, मोहित के मम्मी पापा मोहित के साथ बहुत खुश थे, लेकिन बहु हमेशा बड़बड़ाती रहती, एक दिन मोहित को एक मीटिंग के लिए शहर से कुछ दिनों के लिए बाहर जाना था, मोहित ने मेड को सब कुछ समझा दिया था कि मेरे बाद मम्मी पापा को कोई तकलीफ नहीं होनी चाहिए, मोहित बेटा तुम क्यों इतनी चिंता करते हो तुम बेफिक्र होकर अपने काम के लिए जाओ कमला जी ने अपने बेटे के सिर पर हाथ रखते हुए कहा। और मोहित मीटिंग के लिए शहर चला गया। बेटे के जाते ही नेहा हमेशा सास-ससुर को ताना देती रहती। यहां आकर पड़ गए हैं इतना भी नहीं जानते शहर में कितने महंगाई है, इनके आते ही घर में कितने खर्चे बढ गए हैं, पूरे घर को दवाई खाना बना कर रखा है, अरे मेरे मायके में तो इन दिनों को कोई नौकर भी ना रखे, गवार कहीं के, ना पहनने की तमीज है ना खाने की बहू की बातें सुनकर दोनों चुप रह जाते, बहू ने घर के नौकर को बेटे के जाते ही उसकी छुट्टी कर दी, और उसकी जगह मिश्रा जी को काम पर लगा दिया। नेहा दनदनाते हुए, उनके कमरे में आई और तमक कर बोली, बहुत हो गए मेहमान बाजी, अब चलिए पापा जी थोड़ा हाथ पैर भी चला लीजिए। वरना बुढ़ापे में ख़ून जाम हो गए तो आपको ही तकलीफ होगी, नेहा तमक कर बोली, मम्मी जी आप थोड़ा रसोई में आकर मेरा हाथ बटाइए, बेटा तुम्हें जितना काम बताना है मुझे बता दो, पर कमला से यह सब नहीं होगा, हां आप दोनों तो यहां मुफ्त की रोटी तोड़ने को ही पड़े हैं बस काम को कह दो तो बहाने बनाने लगते हैं, नेहा मन ही मन कुछ बुदबुदाते ते हुए बोली, यह पकड़िए थैला और सब्जी लेकर आइए, और हां सब्जी लाकर रसोई में धोकर रख देना, मिश्रा जी ने थैला पकड़ा और सब्जी लाने चल चले गए, और लाकर उन्हें रसोई में रख दी, बेटा मैंने सब्जी रसोई में धोकर रख दी है सुबह-सुबह सब्जी लाने और धोने में हाथ पैर सन हो गए. दो कप चाय बना दो बेटा मैं आपकी नौकरानी नहीं हूं जो आप मुझे ऑर्डर दे रहे हैं, सब्जी लाकर आपने कोई एहसान नहीं किया है, यहां रहेंगे तो काम भी करना पड़ेगा, जाइए, खुद बना लीजिए। बहू ने एकदम से तमक कर कहा, और अपनी चाय लेकर कमरे में चली गई, मिश्रा जी ने दो कप चाय बनाई और खुद लेकर अपने कमरे में चले गए, यह देखकर कमला जी की आंखों में आंसू आ गए क्योंकि उन्होंने बहू की सारी बातें सुन ली थी, अरे कमला तुम चाय पियो और सब भूल जाओ, हमारा बेटा हमारे साथ है तो हमें चिंता करने की कोई जरूरत नहीं है, कमला जी ने अपने आंसू पूछे और दोनों चाय पीने लगे, दोपहर को रसोई में जाकर देखा तो बहू ने खाना भी नहीं बनाया था , , तो मिश्रा जी ने खुद ही खाना बनाया और कमला जी को भी खिलाया। कमला जी से अब काम नहीं होता था क्योंकि उनके हाथ पैर अब ज्यादा ही दर्द करने लगे थे, बहू कमरे में से बाहर आई तो अकड़ कर बोली यह क्या है, आप लोगों को जरा भी तमीज नहीं है, पूरी रसोई फैला रखी है गवार कहीं के, मुझे पूरी रसोई साफ चाहिए जब से आए हैं एक भी काम को हाथ नहीं लगाया, मिश्रा जी बोले, बेटा तुम चिंता मत करो मैं खुद कर दूंगा रसोई और बर्तन साफ कर दूंगा, इतना कह बहु वहां से चली गई, बेचारे मिश्रा जी ने सारी रसोई और बर्तन साफ किए, कुछ खाना दोपहर का ही बच गया था तो शाम को वही खाकर सो गए, बेटा मां बाप का हाल-चाल पूछने के लिए रोज सुबह शाम फोन करता, मगर मिश्रा जी और कमला जी अपने बेटे से बहू की कुछ भी शिकायत नहीं करते, अगली सुबह बहू 200 रु सब्जी लाने केलिए देते हुए बोली, सारी सब्जी का हिसाब पर्चे पर लिखवा कर लाना। मिश्रा जी चुपचाप थैला लेकर चले गए, सब्जी वाले को मिश्रा जी थैला पकड़ा दिया, अच्छा

Best emotional story in hindi

भाई एक काम करो एक कागज पर हिसाब लिख देना, अच्छा बाबू जी कहते हुए सब्जी वाले ने पास रखे कागज के एक टुकड़े पर सारी सब्जी के दाम लिखकर बाबूजी को पकड़ा दिया, मिश्रा जी सोचने लगे चलो अच्छा है सारी सब्जी का दाम और वजन पेपर पर लिखा है तो बहू को कोई शक भी नहीं होगा, बेचारे बाबूजी की इस कड़ाके की सर्दी में सब्जी लाते हुए हालत खराब हो गई। रास्ते में उन्हें एक चाय की दुकान दिखाई दी, तो वहां रुक कर उन्होंने 10 रु की चाय पी ली, थोड़ी देर बाद पास में जल रही आग पर अपने हाथ पैर सेके और बेचारे फिर चल दिए सब्जी का थैला लेकर इतनी ठंड में ऐसा लग रहा था जैसे हाथ पैर  कटे जा रहे हो, जैसे तैसे बेचारे बाबूजी घर पहुंचे, रसोई में सब्जी धोकर रख दी बहू सब्जी आ गई है लेकिन बहू अभी सोकर ही नहीं उठी शायद दोबारा सो गई थी, उन्होंने खुद ही दो कप चाय बनाई और अपने कमरे में चले गए, थोड़ी देर बाद बहू के चिल्लाने की आवाज आई मुझे पता था चोरी तो इन जैसे लोगों के खून में ही बसी होती है, बाबूजी सब्जी में से ₹10 बचे थे वह कहां चले गए।आपको इतना भी नहीं पता, कि किसी की चीज उससे बिना इजाजत नहीं लेनी चाहिए कहां है बाकी के पैसे, बाबूजी संकोचते हुए बोले, बहुत ठंड लग रही थी रास्ते में मैंने 10 रु की चाय पी ली, यहां तक आने में आपके हाथ पैर टूट नहीं जाते घर आकर नहीं पी सकते थे, एक तो हमारे सिर पर आकर बैठ गए हैं, और हमारे ही नाक में दम कर रखा है इस तरह की बातें सुनकर दोनों की आंखें नम हो गई। पर बेटे के खातिर वह सब कुछ चुपचाप सह गए, अब तो बाबूजी रोज ही अपना और अपनी पत्नी का चाय नाश्ता खाना सब खुद बनाते और बर्तन रसोई भी खुद ही साफ करते, अगले दिन बहू की सहेली उससे मिलने घर आई, तब बाबूजी कमला जी के लिए दलिया बना रहे थे, अरे रीटा तू क्यों आई मुझे बुला लिया होता मैं खुद आ जाती तुझसे मिलने, नेहा ने हडबढ़ाते हुए अपनी सहेली से कहा, क्यों मैं तेरे घर नहीं आ सकती क्या नहीं ऐसी बात नहीं है, अच्छा चल तू मेरे कमरे में चल वहां चल कर बात करते हैं, नेहा रीटा को हाथ पकड़कर तेजी से अपने कमरे में ले गई ताकि पाबूजी पर उसकी नजर ना पड़े, दोनों आपस में बातें ही कर रही थी कि बाबूजी वहां पहुंच गए, बहु मुझे घी नहीं मिल रहा है कहां रखा है। आप से कितनी बार कहा है कि मेरे कमरे में मत आया करो, समझ नहीं आता क्या अब जाओ यहां से, नेहा बाबुजी पर चिल्लातेहए बोली रीटा ने नेहा से पूछा, कौन है , और पहले तो कभी नहीं देखा अरे कुछ नहीं नया नौकर है यार, अभी नया-नया लगा है ना, तो इसे कुछ पता नहीं है कौन सा सामान कहां रखा है बहू की बातें सुनकर बाबूजी की आंखें नम हो गई, पीछे से बहू ने आवाज दी सुनो, मेरी और मेरी सहेली के लिए दो कप कॉफी लेकर आओ जल्दी, बाबूजी ने अपने आंसू


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पूछे और कॉफी बनाकर बहू के कमरे में ले गए और चुपचाप वहां से वापस आए और अपनी पत्नी के लिए बिना घी का दलिया लेकर चले गए, क्या हुआ जी बहू किस पर चिल्ला रही थी, अरे कुछ नहीं, तुम दलिया खाओ वरना ठंडी हो जाएगी इतने में बहु चिल्लाते हुए आई, अगर कॉफी बनानी नहीं आती तो बता नहीं सकते थे, मुंह का सारा टेस्ट खराब कर दिया। क्या हुआ बहू, कमला जी ने प्रेम से अपनी बहू से पूछा, आप चुप रहिए काम की ना काज की दुश्मन अनाज की, अभी मैं बाहर जा रही हूं अपनी सहेली के साथ, आप लोगों को तो आकर बताती हूं, और हां मेरे आने से पहले, घर पूरा साफ हो जाना चाहिए, इतना कह कर बहु अपनी सहेली के साथ बाहर निकल गई, बहु की बातें सुनकर कमला जी रोने लगी अरे कमला तुम बात बात पर रोया मत करो, देखो अगर मैं थोड़ा बहुत घर का काम कर भी लेता हूं तो इसमें क्या बुरा है, तुम ही तो कहती हो कि आदमी के हाथ पैर चलते रहने चाहिए वरना उसका शरीर जाम हो जाता है, और ऊपर से 100 बीमारियां और लग जाती हैं। बाबूजी ने कमला जी के आंसू पूछे और उन्हें कंबल उड़ा कर आराम करने के लिए बोल दिया, और खुद रसोई में बर्तन साफ करने लगे, दूसरे शहर में कंपनी की मीटिंग करके मोहित घर आया मम्मी पापा कहां हो आप, देखो मैं तुम्हारे लिए क्या लाया हूं, मम्मी पापा के कमरे में रोहित दौड़कर गया मां के पैर छूते हुए बोला, अरे मां कैसी हो और आपकी तबीयत कैसी है, बेटे को सामने देख कमला जी की आंखें भर आई, मां देखो तो मैं दिल्ली से आप लोगों के लिए क्या लेकर आया हूं। आपके लिए नया शाल, नई जर्सी, और बाबूजी कहां है मैं कब से पूछ रहा हूं वह कहीं दिख नहीं रहे, कमला जी ने रोते-रोते अपने बेटे से सब बता दिया, यह सुन मोहित के पैरों तले जमी खिसक गई रसोई में जाकर देखा तो बाबूजी रसोई में बर्तन साफ कर रहे थे। यह देख मोहित की आंखों में आंसू आ गए। अरे बेटा तुम, कब आए, हां बाबूजी काम जल्दी हो गया था तो बस चला आया इतने में नेहा भी वहां घर पहुंच गई थी और मोहित को देखकर उसके होश उड़ गए अरे मोहित, तुमने तो बोला था कि तुम 2 दिन बाद आओगे। फिर यहां कैसे नेहा जैसे ही मोहित के पास आने लगी मोहित ने एक जोरदार तमाचा नेहा के गाल पर जड़ दिया तुम्हारी हिम्मत कैसे हुई मेरे देवता समान मां-बाप के साथ ऐसा करने की यह घर उनके बेटे का है तुम इसे कोई दहेज में नहीं लेकर आई थी मोहित ने नेहा के ऊपर चिल्लाते हुए कहा, मुझे लगा था कि कुछ दिनों में तुम मेरे मम्मी पापा को अपने माता पिता की तरह प्यार 


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और सम्मान दोगी, क्योंकि हर रिश्ते को समझने में वक्त लगता है लेकिन तुमने तो मेरे बाद मेरे मां-बाप की हालत नौकरों से भी ज्यादा बद से बदतर कर दी, तुमने एक एक पाई का हिसाब लिया, उनकी बेइज्जती की, वह अपने बेटे की कमाई खाते हैं तुम्हारी बाप की नहीं समझी तुम, अपना सामान बांधों और निकलो यहां से, मोहित ने नेहा के ऊपर गुस्साकर कहा, इस घर में तुम्हारे लिए कोई जगह नहीं नेहा रोते हुए मोहित के पैरों में गिर कर माफी मांगने लगी। मोहित तुम ऐसा कैसे कर सकते हो मेरे साथ तुम मुझसे प्यार करते हो ना हां प्यार करता हूं लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि मैं अपने जन्मदाता माता-पिता का अपमान सहूं तुम्हारे लिए उनको अकेला छोड़ दूं मैंने सोचा था कभी ना कभी तो तुम मेरे मम्मी पापा को समझोगी लेकिन नहीं मैं गलत था तुम जैसी औरतें ही हंसते खेलते परिवार को भी नर्क बना कर रख देती हैं देखो मेरी मम्मी पापा को अभी भी वह तुम्हारे खिलाफ एक शब्द भी नहीं बोल रहे हैं और तुमने मेरे मम्मी पापा की हालत नौकरों से भी बदतर कर दी अरे शर्म आ रही है मुझे अपने आप पर इतना कहकर मोहित अपनी मम्मी-पापा के पैरों में बैठ कर मां की गोद में सिर रख कर रोने लगा. मां मुझे माफ कर दीजिए मेरे रहते आज के बाद आप दोनों को कोई तकलीफ नहीं होगी, नेहा भी कमला जी के पैर पकड़ कर, रोते हुए बोली, मम्मी जी मुझे माफ कर दीजिए, मुझसे बहुत बड़ी गलती हो गई, पैसों के घमंड में मैंने आपके साथ बहुत बुरा बर्ताव किया, कमला जी बोली बेटा माफ कर दे अब बहू को। लड़ाई झगड़े किस घर में नहीं होते, लेकिन रोहित ने उनकी एक न सुनी और उसका हाथ पकड़ कर उसे घर से बाहर निकाल दिया। बाबूजी ने रोहित को रोकना चाहा नहीं पापा, आप ऐसा नहीं करेंगे, अगर मैने आज नेहा को माफ कर दिया। तो जो औरतें अपने सास ससुर के साथ नौकरो जैसा बर्ताव करती है उनको सबक कैसे मिलेगा। दोस्तों उम्मीद करता हूं आपको हमारी कहानी पसंद आई होगी कहानी पसंद आई है तो story को लाइक करें website पर नए हैं तो website सब्सक्राइब करें

(लोंग इमोशनल ईसटोरी इन हिन्दी)



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