Suvichar|| Best hindi kahaniyan|| Best hindi Story

 Suvichar || Best Emotional hindi story


और मुझे खिलें हुए गुलाब के भी दर्शन हो गए 🌹🌹💃


मेरे अंदर कुछ ख्वाहिश ऐसी थी जो चाह कर भी मैं किसी से कह नहीं पता था  मेरा नाम अंश है मेरी उम्र लगभग 21 साल है. गांव में दीपावली की तैयारी चल रही थी सभी घरों में साफ सफाई का काम चल रहा था. हमारे घर के पास में ही मेरी सबसे छोटी भाभी रहती है मेरी छोटी भाभी बिंदास औरत है. लेकिन मैंने कभी भाभी के साथ वह सब करने के बारे में नहीं सोचा मैं उनके घर पर ऐसे ही आता जाता रहता था.भाभी अपने कामों में लगी रहती थी कभी-कभी मुझे गोल मटोल का नजारा देखने को मिल जाता था लेकिन मैं सिर्फ नजारा देख कर ही रह जाता था आगे कुछ करने की मेरी कभी हिम्मत नहीं हुई। एक दिन दोपहर में मैं ऐसे ही भाभी के घर गया जैसे ही मैंने गेट खोला तो भाभी का नजारा देखकर मैं एकदम से ठहर गया। और मेरा तन गया उस टाइम भाभी नहा रही थी। ऊपर से भाभी खिलते गुलाब की तरह भीगा हुआ बदन  उपर से भाभी की नजारे ने मेरे शरीर में आग लगा दी. तभी भाभी की नजर मेरे ऊपर पड़ी और मुझे अपने पास देखकर हकी-बकी रह गई। मुझे देखकर भाभी के चेहरे की हवाई उड़ चुकी थी। उन्होंने अपने शरीर को ढक लिया फिर बड़ी मुश्किल से भाभी ने खुद को सम्बाला। भाभी ने कहा तू कब आया मैंने कहा मैं तो अभी आया हूं वह गेट खुला हुआ था। तो मैं सीधा अंदर ही आ गया भाभी आप गेट को अंदर से बंद करना भूल गई थी। तभी मेरा दिमाग दौड़ा और मैंने सोचा अगर नजारा और देखना है तो बेशर्म होकर यही बैठ जा तू ,कम से कम देखने को तो मिलेगा तभी मैंने भाभी से कहा भाभी आप नहा लो। मैं यहीं बैठ जाता हूं घर पर मैं बोर हो रहा हूँ। मैं बेशर्म होकर बरामदे में बैठ गया। और भाभी कुछ नहीं कह पाई अब भाभी ने मजबूर होकर मुंह गेट की तरफ कर लिया। थोड़ी देर बाद भाभी नहा  चुकी थी। तार पर अपने गीले कपड़े सुखाने के लिए फैला दी। मेरा दिल करने लगा इस कपड़े को मैं ही ले लूं लेकिन फिलहाल इतनी हिम्मत नहीं थी। फिर भाभी अंदर गई और कपड़े पहन कर बाहर आई भाभी मुझसे नजर नहीं मिला रही थी। वह इधर-उधर का काम करने लगी लेकिन मेरी नजर तो भाभी पर टिकी हुई 



थी। मेरा बुरी तरह से तना हुआ था भाभी और हम दोनों ही चुप थे। अब मुझे कंट्रोल करना मुश्किल हो रहा था तभी मेरा निकल गया। और मैं ढीला पड़ गया भाभी बिल्कुल चुप थि। तभी मैं बात को संभालते हुए भाभी से बातचीत करने लगा भाभी अगर आपको बुरा लगा हो तो सॉरी भाभी, अरे ऐसी बात नहीं है अंश तू अच्छा लड़का है मैं अच्छी तरह से जानती हूं। मैंने कहा लेकिन फिर भी आपने मुझे कुछ बोला नहीं भाभी ने कहा अरे यार कुछ नहीं बस आगे से गेट खटखटा कर आना। मैंने कहा ठीक है भाभी फिर हमारे लिए चाय बनाई और मैं चाय पीकर घर आ गया। घर आने के बाद रात में भाभी का नजारा मेरे  दिल दिमाग घूमने लगा मैं बार-बार उसके साथ वह सब करने के बारे में सोच रहा था। लेकिन दिल गवाही नहीं दे रहा था। मेरी अंदर से बेचैनी बढ़ती जा रही मैं अगले दिन फिर भाभी के पास गया। भाभी आज भी घर में अकेली थी बच्चे स्कूल गए हुए थे। अब मुझे कैसे भी

करके भाभी से बात करना था भाभी काम कर रही थी। मैं भाभी के काम को ताड रहा था भाभी को देखकर मेरे मन के अन्दर तूफान मच रहा था। तभी मैंने सोचा ऐसे बैठे रहने से काम नहीं चलने वाला अगर भाभी चाहिए तो किसी ना किसी बहाने से भाभी से बात करने की सोच रहा था। अब मेरी हिम्मत और भी भडती जा रही थी ऐसे ही दो-तीन दिन निकल गए। एक दिन में चाची के घर पर था भाभी साफ सफाई कर रही थी तभी चाची ने हेल्प करने के लिए मुझे अंदर बुलाया भाभी को पलंग उठाना था। मैं पलंग उठाकर भाभी की हेल्प करने लगा तभी भाभी की साड़ी का पल्लू नीचे गिर पड़ा। और मुझे खिलें हुए गुलाब के भी दर्शन हो गए तभी भाभी की नजर मुझ पर पड़ी। लेकिन भाभी कुछ नहीं कर सकती भाभी पलंग को पकड़ कर बाहर निकाल रही थि। कुछ देर बाद भाभी ने पल्लू ठीक किया भाभी मेरे खड़े के दर्शन कर चुकी थी भाभी की नजरें कुछ बड़की बड़की नजर आ रही थी मैं बाहर बैठ गया। और भाभी रूम में झाड़ू लगाने लगी मेरा बहुत ज्यादा भड़क रहा था। अब मुझसे रहा नहीं जा रहा था इधर मेरे को देखकर भाभी भी बहकी नजर आ रही थी लेकिन 



वह कुछ नहीं कह रही थी। अब मैं रूम में जाकर भाभी के पीछे खड़ा हो गया तभी भाभी झाड़ू लगाती पीछे सरकि और भाभी मुझसे टकरा गई । भाभी ने कहा अंश तू बाहर बैठ यार अभी मेरे लग जाती तो मैंने कहा ठीक है भाभी,, मैं दूसरे रूम में चला गया । थोड़ी देर बाद भाभी मेरे कमरे में आई भाभी ने कहा अंस देख मैं तेरी हालत समझती हूं। इस उम्र में ऐसा होता है लेकिन अच्छा यह रहेगा तु बाहर कहीं पर अपना जुगाड़ बना। मैंने कहा भाभी बस यही तो मुझसे नहीं हो पा रहा है। भाभी ने कहा जितनी हिम्मत तू यहां दिखा रहा है ना उतनी हिम्मत कही और दिखा सब हो जाएगा। मैंने कहा भाभी बाहर हिमत नहीं होती है। बदनामी का डर लगता है मैं इतना बड़ा हो गया हूं फिर भी मैंने कुछ नहीं किया है। भाभी ने कहा कुछ पाने के लिए हिम्मत तो करनी पड़ेगी ना। मैंने कहा भाभी मुझसे बस एक ही हिम्मत हो पा रही है भाभी ने कहा क्या। मैं बहुत ज्यादा डर रहा था डर से मेरी फट रही थी। लेकिन भाभी को हिम्मत दिखाने का मौका मिल चुका था मैंने कहा। भाभी बुरा मत मानना चीज चाहिए भाभी मेरी बात सुनते ही चौक गई। वह थोड़ी देर रुकी फिर बोली तू जो कह रहा है ना वह नहीं हो सकता। इससे अच्छा है मैंने तुझे जो बोला तू वह कर मैंने कहा भाभी मैं नहीं कर पाऊंगा। आप बस एक बार मुझे मौका दो भाभी ने कहा पागल हो गया है क्या तू मैं तेरी भाभी हूं। तुझे सही सलाह दे रही हूं वह तू मान नहीं रहा है। मेरी बात सुनकर भाभी चुप हो गई उन्होंने मेरी बात का जवाब नहीं दिया  मैंने कहा बोलिए ना भाभी नहीं हो क्या भाभी ने कहा चुप रह यार तू मैं तो तुझे सही सलाह दे रही थी। और तू न जाने क्या-क्या इतना कहकर भाभी काम करने लग गई। अब मैं भाभी की पीछे-पीछे खड़ा हो गया फिर थोड़ी देर बाद में घर आ गया। जैसी तैसी सुबह हुई और बच्चों के स्कूल जाने के बाद में भाभी के पास पहुंच गया। भाभी वही साफ सफाई का काम कर रही थी। मैंने कहा भाभी यार मेहरबानी कर दो ना निकल तू यहां से कोई मेहरबानी नहीं करूंगी। अंस तू हमारे रिश्ते के बारे में तो थोड़ा सोच। मैंने कहा भाभी मैंने सब कुछ सोच रखा है अगर आप तैयार 


हो जाओ तो सब कुछ हो सकता है। भाभी ने कहा मैं कभी तैयार नहीं होगी अब तू चुपचाप बैठ । उसके बाद भाभी ने कहा तू अभी यहीं बैठा है ,गया नहीं, मैंने कहा भाभी अब मैं नहीं जाने वाला जब तक तुम हां नहीं बोलोगी। फिर भाभी ने कहा चल ठीक है आज । यह सुनकर दोस्तों मेरी खुशी का कोई ठिकाना नहीं रहा। आप कमेंट करके हमें जरुर बताएं रोमांटिक कैसी लगी दोस्तो उम्मीद करता हूं आपको हमारी कहानी पसंद आई होगी कहानी पसंद आई है तो वीडियो को लाइक करें चैनल पर नए हैं तो चैनल को सब्सक्राइब करे और हां नोटिफिकेशन बेल को जरूर दबाए ताकि अगली अपडेट सबसे पहले आपको मिले सो फ्रेंडथैंक्स फॉर वाचिंग माय स्टोरी वीडियो 


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