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(झाड़ फूंक से बच्चे भी पैदा होते हैं ) 😜😋

ना जाने क्यों मुझे इस तरह की बात सुनकर बहुत ज्यादा बेचैनी होती है बच्चा न होने के चलते नीतू को अक्सर रोहित के ताने भी सुनाई पड़ रहे थे इसलिए वह कुछ दिनों के लिए मायके में अपनी मां के पास चली आई। मां को जब इसकी वजह पता चली तो उसने नीतू से कहा कि वह एक पहुंचे हुए बाबा को जानती है जो बहुत ही औरतों की गोद हरी कर चुके हैं। नीतू झाड़ फूंक करने वाले बाबा और पीर फकीरों पर जरा भी यकीन नहीं करती थी, इसलिए उसने मां को साफ-साफ मना कर दिया। मां ने उससे कहा कि अगर वह बाबा के पास नहीं जाना चाहती तो वह अपने पति के घर वापस लौट जाए। जब नीतू ने रोहित से बात की तो उसने कहा कि वह उससे तलाक लेना चाहता है, क्योंकि उसे बच्चा नहीं हो रहा था। ऐसे में नीतू के पास मां की बात मानने के सिवाय कोई दूसरा रास्ता ही नहीं बचा था। एक दिन जब नीतू मां के साथ बाबा के आश्रम पहुंची तो पता चला कि उस आश्रम में मर्दों के आने की मनाही थी। उस आश्रम में उस बाबा को छोड़ उसके तीमारदारों में सिर्फ औरतें ही शामिल थी। बाबा की शिष्याओं ने नीतू से एक कागज के टुकड़े पर बिना किसी को दिखाए अपनी मनपसंद मिठाई का नाम लिखने को कहा। नीतू को कुछ समझ नहीं आ रहा था लेकिन वह मां की इच्छाएं रखने के लिए सब कुछ करती गई। नीतू ने उस कागज पर मनपसंद मिठाई का नाम लिखकर उसे एक डब्बे में रख दिया, जिसमें बाबा के शिष्य ने ताला लगाकर नीतू को यह कहते हुए उसके हाथ में थमा दिया कि वह इस डब्बे को लेकर साधना कक्ष में जाए। बाबा अपनी चमत्कारी शक्तियों की बदौलत यह जान गए होंगे कि उसने इस कागज में क्या लिखा है। साधना कक्ष में पहुंचने पर उसे वही मिठाई खाने को मिलेगी जो उसने कागज पर लिखी है। नीतू जब बाबा के पास साधना कक्ष में जाने लगी तो उसकी मां भी उसके साथ अंदर गई। बाबा ने नीतू 



को वही मिठाई खाने को दी जो उसने कागज पर लिखी थी, तो वह हैरान रह गई क्योंकि नीतू के सिवाय किसी को भी यह नहीं पता था कि उसने कागज पर क्या लिखा है। उसने बहुत दिमाग दौड़ाया लेकिन गुत्थी सुलझा नहीं पायी। समस्या जानकर बाबा ने नीतू से कहा अगर तुम पेट से होना चाहती हो तो तुम्हें रात भर इस कमरे में अकेले ही रहना होगा, क्योंकि यह मेरा साधना कक्ष है। इस कक्ष में सोने से तुम्हारी गोद यकीनन हरी हो जाएगी। नीतू को इस कमरे में अकेले रात बिताने पर ऐतराज था। इस पर बाबा ने कहा इस कमरे में कोई और दरवाजा नहीं है और तुम अकेली ही रहोगी। तुम इस कमरे में अपने साथ ले गए ताले को लगा लेना, जिसकी एक चाबी तुम्हारी मां के पास रहेगी। कमरे में किसी के घुसने का सवाल ही नहीं उठता। नीतू बेमन से कमरे में रात बिताने को तैयार हो गई बाबा और उसकी मां जब कमरे से बाहर निकलने लगे तो बाबा बोला नीतू जो प्रसाद मैंने तुम्हें दिया है उसे अभी खा लो नीतू ने मिठाई खा ली बाबा को बाहर निकालने के बाद कमरे में ताला लगाकर चाबी नीतू की मां को दे दी। उधर मिठाई खाने के बाद नीतू पर अजीब सी खुमारी छाने लगी। वह अपनी सुध बुध खोने लगी थी और उसकी नींद तब खुली जब दूसरे  दिन की सुबह उसकी मां ने बंद कमरे का दरवाजा खोला। नीतू कमरे से बाहर निकलते समय सोच रही थी कि उस मिठाई में ऐसा क्या था जिसे खाने के बाद उसे अजीब सी खुमारी छा गई और इसके बाद क्या हुआ उसे पता नहीं चला। लेकिन वह बेफिक्र भी थी क्योंकि उस कमरे की चाबी उसकी मां के पास थी और कमरे में घुसने का कोई दूसरा दरवाजा ही नहीं था। नीतू को बाबा के आश्रम से लौटे दो महीने बीत चुके थे कि एक दिन अचानक उसे उल्टियां होने लगी। उसने अपने डॉक्टर दोस्त अरविंद से जब चेकअप कराया तो पता चला की वह पेट से है। डॉक्टर अरविंद की बात का नीतू 


को यकीन ही नहीं हुआ। क्योंकि उसे पति से अलग हुए 6 महीने से ऊपर बीत चुके थे। लेकिन वह पेट से कैसे हो सकती है। नीतू ने कहा कि डॉक्टर साहब आप एक बार फिर से रिपोर्ट देख लीजिए कहीं ऐसा ना हो की जांच रिपोर्ट में कोई खामी हो। लेकिन डॉक्टर अरविंद ने कहा कि उसकी रिपोर्ट बिल्कुल सही है और वह पेट से है। घर पहुंचने पर नीतू ने अपनी मां से पेट से होने की बात बताई तो मां को खुशी का ठिकाना ना रहा। लेकिन नीतू बोली कि वह रोहित से 6 महीने से मिली ही नहीं तो ऐसा कैसे हो सकता है। नीतू बोली मां बाबा के आश्रम में मेरे साथ गलत किया गया है। कहीं तुमने बाबा के साधना कक्ष की चाबी किसी को दी तो नहीं थी। मां बोली नहीं-नहीं मैंने तो सारी रात चाबी अपने पास ही रखी थी, और सुबह दरवाजा भी मैंने ही खोला था। नीतू यह बात मानने को तैयार ही नहीं थी। उसका कहना था कि बाबा के आश्रम में ही ग़लत हुआ है। जिसके चलते वह पेट से हुई है लेकिन उसकी मां-बाबा के खिलाफ एक बात सुनने को राजी न थी, वह तो इसी बाबा का चमत्कार मान रही थी। नीतू ने यह बात जब रोहित को फोन करके बताई तो उसने उस पर ही चरित्रहीन होने का लांछन लगा दिया और कभी भी फोन नहीं करने की बात कह कर फोन काट दिया। उधर नीतू को अब पूरा यकीन हो चुका था कि उस रात बाबा के आश्रम में उसके साथ कोई तो हमबिस्तर हुआ था। हो न हो उस कमरे में कोई गुप्त दरवाजा है। उसी रास्ते से कोई उस कमरे में घुसता है और साधना कक्ष में पेट से होने के लालच में रात बिताने वाली औरतों के साथ गलत काम करते हैं नीतू ने अब निश्चय कर लिया कि वह उस पाखंडी बाबा की हकीकत दुनिया के सामने लाकर रहेगी। नीतू ने अपने मन की बात मां को बताई तो मां बाबा के खिलाफ जाने को तैयार नहीं हुई। पर जब नीतू ने अपनी जान देने की बात कही तो मां उसका साथ देने को 


तैयार हो गई। नीतू इस बार फिर बाबा के आश्रम पहुंची और उसने बाबा को बताया कि वह उनके चमत्कार से पेट से तो हो गई लेकिन उसका पति उसे तलाक लेकर दूसरी शादी करना चाह रहा है। ऐसे में वह नहीं चाहती कि वह पेट से हो इसलिए वह चमत्कार करके उसे पेट से होने से रोक ले। बाबा ने नीतू को एक पुड़िया देकर कहा तुम इस चमत्कारी भभूत का सेवन करो इससे तुम्हारे कष्ट दूर हो जाएंगे और पेट में पल रहा बच्चा भी अपने आप छूमंतर हो जाएगा। नीतू बाबा के आश्रम से घर आई और उस बाबा द्वारा दी गई भभूत को डॉक्टर अरविंद के पास ले गई। डॉक्टर अरविंद ने उस भभूत को लैब में टेस्ट के लिए भेजा तो उसमें बच्चा गिराने की दवा निकाली। अब नीतू को पूरा यकीन हो चुका था कि बाबा के आश्रम में औरतों के साथ जबरदस्ती संबंध बनाने का खेल खेला जा रहा है। नीतू दोबारा उस बाबा के आश्रम में पहुंची और बाबा से बोली बाबा आप के चमत्कार के चलते पेट में पल रहा मेरा बच्चा अपने आप छूमंतर हो गया। मेरा पति मुझे अपनाने को तैयार हो गए हैं उन्होंने एक शर्त रखी है कि इस बार मुझे वह तभी वापस ले जाएंगे जब मैं वहां जाने पर पेट से हो जाऊं। मैं चाहती हूं कि आपके चमत्कार से एक बार फिर मैं पेट से हो जाऊं क्योंकि इस बार अगर मैं पेट से ना हुई तो वह हमेशा के लिए छोड़ देंगे। बाबा ने कहा तुम दोबारा पेट से हो सकती हो बस एक रात साधना कक्ष में गुजारनी होगी। नीतू साधना कक्ष में रात गुजारने को तैयार हो गई पर  इस बार उसने पुलिस से मिलकर उस बाबा की असलियत बता दी। लेकिन पुलिस बिना सबूत उस बाबा पर हाथ नहीं डाल सकती थी। इसलिए पुलिस ने नीतू को सबूत इकट्ठा करने के लिए  फिर से बाबा के पास जाने को कहा था। इस बार नीतू पूरी तैयारी के साथ बाबा के आश्रम में आई थी और बोली कि उसकी माहवारी आने के बाद का 12 वां दिन है। साधना कक्ष में बैठा बाबा नीतू के साथ आई 



दूसरी औरत को देखकर चौंक गया और पुछा यह कौन है? नीतू ने बताया यह मेरी मौसी है बाबा। आज मां की तबीयत खराब होने के चलते मौसी के साथ आना पड़ा। हकीकत तो यह थी कि अंजलि के साथ आई वह औरत पुलिस वाली थी। बाबा के आश्रम में महिला पुलिस भी श्रद्धालुओं के रूप में फैली हुई थी। बाबा ने नीतू को फिर वही मिठाई खाने को दी जो उसने पर्ची पर लिखी थी। लेकिन इस बार नीतू को जरा भी हैरानी नहीं हुई क्योंकि उसे यह पता चल चुका था कि बाबा को पर्ची पर लिखी गई  बात पता चल जाती है। इसके पीछे कोई ना कोई राज जरूर था जिससे आज पर्दा उठने वाला था। नीतू इसी सोच में डूबी थी कि बाबा की आवाज उसके कान में गूंजी अब तुम रात बिताने को तैयार हो जाओ और मिठाई खाकर आराम करो। इतना कह कर बाबा बाहर चला गया और नीतू के साथ आई मौसी भी साधना कक्ष में ताला लगाकर अपनी आरामगाह में चली गई। साधना कक्ष में बंद अंजलि ने इस बार बाबा की दी हुई मिठाई नहीं खाई। वह बाबा का हर राज जान लेना चाहती थी। उसने जब कमरे को बारीकी से देखा तो ऐसा कुछ नजर नहीं आया जिससे उस कमरे में आने के सभी दूसरे रास्ते के बारे में पता चल जाए। तभी नीतू की नजर बाबा के साधना कक्ष के कोने में रखी अलमारी पर गई उसने जैसे ही अलमारी के दरवाजे का हैंडल पकड़ कर खोला तो दरवाजा खुल गया। यह देखकर अंजलि चौक गई क्योंकि वह नाममात्र की अलमार थी। वह इस कमरे में घुसने का एक खुफिया दरवाजा था जो दूसरे कमरे में जाकर खुलता था। बगल वाले कमरे में एक बड़ी सी स्क्रीन लगी हुई थी जो पूरे आश्रम का नजारा दिखा रही थी। तभी नीतू की नजर एक छोटी सी स्क्रीन पर गई। उस स्क्रीन पर चल रही विडियो को अपनी नजरों में जो देखा उसके बाद उसे पर्ची पर लिखी हर बात के बारे में बाबा को पता चल जाने का राज समझ में आ गया, 


क्योंकि जहां पर बैठकर औरतें अपनी मनपसंद मिठाई का नाम लिखती है। वहां आसपास छुपा हुआ कैमरा लगा था। बाबा इस कमरे में बैठकर जान लेता कि किसने कौन सी मिठाई का नाम लिखा है। फिर उसमें वह बेहोशी की दवाई मिलकर खुफिया दरवाजे से साधना कक्ष में आ जाता है नीतू को उस कमरे में तरह-तरह की मिठाइयां एक फ्रिज में रखी हुई मिल गई। तभी उसे दुसरे कमरे में कुछ खटपट की आवाज सुनाई दी वह समझ गई कि कमरे में बाबा के आने का समय हो गया है। वह बड़े सावधानी से साधना कक्ष में लौट आई। वह अपने साथ आई महिला पुलिस को फोन करना नहीं भूली। नीतू बिस्तर पर बेहोशी का नाटक करके पड़ी थी। बाबा साधना कक्ष में आ चुके थे। नीतू सब कुछ कनखियों से देख रही थी। बाबा अपने कपड़े  उतार चुका था। वह नीतू के पास आने ही वाला था कि नीतू का जन्नाटेदार थप्पड़ बाबा के कान पर पड़ा। बाबा खुद को संभालते हुए नीतू की तरफ बढा, लेकिन नीतू ने बाबा को इतनी जोर से मारा कि वह चक्कर खाकर गिर गया। नीतू जोर से चिल्लाई इसी के साथ कमरे का दरवाजा फटाक से खुल गया और एक साथ कई पुलिस वाले कमरे में घुस आए। बाबा खुद को संभालता हुआ खुफिया दरवाजे की तरफ लपका। पुलिस वाले भी उसे पकड़ने के लिए उसकी तरफ भागे, लेकिन तब तव बाबा कहां छूमंतर हो गया और पता ही नहीं चला। पुलिस चारों तरफ से आश्रम को घेर चुकी थी। लेकिन बाबा आश्रम में कहीं नहीं मिला तभी आश्रम की एक शिष्य ने जो बताया उससे पुलिस वाले चौक गए। उस शिष्य ने बताया मेरी बहन भी इसी बाबा के चक्कर में पड़कर इसकी शिष्य बन गई थी। लेकिन वह एक दिन बाबा का राज जान गई और उसने बाबा की सारी करतूत की वीडियो भी बना ली। जब बाबा को यह बात पता चली तो उसने मेरी बहन को गायब कर दिया। तब से मैं अपनी बहन की खोज 



में यहां बाबा की शिष्य बनकर उसके खिलाफ सबूत इकट्ठा कर रही हूं। इस दौरान आश्रम में बनाए गए खुफिया ठिकानों के बारे में मुझे पता चल चुका है। बाबा ने आश्रम के अंदर एक खुफिया कमरा बना रखा है जिसमें वह खुद के खिलाफ जाने वालों को न केवल कैद करता है बल्कि उनकी हत्या करके उन्हें वही दफना देता है। उसने पुलिस वालों को आश्रम के पीछे मुंडेर वन में बने गुप्त रास्ते से उस खुफिया कमरे तक पहुंचा दिया। वहां छिपे बाबा को दबोचा गया उस कमरे से पुलिस को भारी मात्रा में हथियार और कैद की गई औरतें भी मिली। उस कमरे में कई कबरे भी थी। जिनकी खुदाई से कई औरतों की अस्थियां बरामद हुई और ढोंगी बाबा को पुलिस पकड़ कर ले गई  दोस्तों ऐसे ढोंगी बाबा पर आपकी क्या राय है कमेंट में जरूर लिखें उम्मीद करता हूं यह कहानी आपको पसंद आई है वीडियो को लाइक करें चैनल पर नए हैं तो चैनल को सब्सक्राइब करें साथ में ही बेल नोटिफिकेशन को ऑन करना ना भूले सो फ्रेंड थैंक्स फॉर वाचिंग माय स्टोरी वीडियो

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